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जालंधर। महात्मा हंसराज डी.ए.वी. इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, जालंधर के परिसर में श्रद्धा, उत्साह एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच पावन हवन यज्ञ का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर श्री अरविंद घई जी, सचिव, डी.ए.वी. कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली, ने मुख्य यजमान के रूप में हवन यज्ञ में आहुति प्रदान की। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों ने पूरे उत्साह एवं श्रद्धाभाव से कार्यक्रम में भाग लिया।

वैदिक मंत्रोच्चारण एवं यज्ञ की पवित्र आहुतियों से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता एवं शांति से भर गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय वैदिक संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आर्य समाज के सिद्धांतों से जोड़ना तथा उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना था।

इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री अरविंद घई जी, सचिव, डी.ए.वी. कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली, ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायक संबोधन देते हुए कहा कि आज के युवा आधुनिक शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी प्रगति के साथ-साथ अपनी वैदिक संस्कृति, संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों से भी जुड़े रहें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है जो सत्य, ईमानदारी, अनुशासन एवं सेवा भावना से परिपूर्ण हो।

श्री घई जी ने कहा कि “आज का युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवा अपनी वैदिक संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़े रहेंगे, तो वे एक सशक्त, संस्कारी एवं नैतिक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में ईमानदारी को सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी उपलब्धियों से अधिक उसके चरित्र एवं आचरण से होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, परिश्रम, अनुशासन, करुणा एवं सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि आधुनिकता को अपनाना आवश्यक है, लेकिन अपनी संस्कृति एवं मूल जड़ों को भूलना उचित नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में वैदिक मूल्यों को आत्मसात कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें।

इस अवसर पर श्रीमती कवलजीत कौर, कार्यवाहक प्राचार्या, ने मुख्य यजमान श्री अरविंद घई जी का हार्दिक स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हवन यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शुद्ध विचारों, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मानुशासन एवं प्रकृति के प्रति सामंजस्य का संदेश भी देता है।

श्रीमती कवलजीत कौर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आधुनिक शिक्षा हमें ज्ञान प्रदान करती है, लेकिन हमारे संस्कार उस ज्ञान को सही दिशा प्रदान करते हैं।

हमें जीवन में निरंतर प्रगति करनी चाहिए, लेकिन अपनी जड़ों एवं अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि नर्सिंग एक सेवा-प्रधान एवं मानवीय व्यवसाय है, इसलिए नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए ईमानदारी, करुणा, संवेदनशीलता, अनुशासन एवं सेवा भावना का विशेष महत्व है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने व्यावसायिक जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का भी संकल्प लें।

उन्होंने कहा कि “जिस ज्ञान में संस्कार जुड़ जाते हैं, वही ज्ञान समाज के लिए वरदान बनता है।” विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए आधुनिक विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही सच्ची प्रगति है।

पावन हवन यज्ञ के दौरान विद्यार्थियों एवं स्टाफ ने श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित कीं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच तथा भारतीय संस्कृति एवं वैदिक मूल्यों के प्रति गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान, विद्यार्थियों, स्टाफ एवं समस्त समाज की शांति, समृद्धि, सुख एवं कल्याण की मंगलकामना की गई।

महात्मा हंसराज डी.ए.वी. इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, जालंधर द्वारा आयोजित यह हवन यज्ञ विद्यार्थियों के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ उनके नैतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय मूल्यों के समग्र विकास की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।

विद्यार्थियों के नैतिक, सांस्कृतिक एवं मानवीय मूल्यों के समग्र विकास की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

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