
Prabhat Times
जालंधर। जिमखाना क्लब के चुनावी समीकरण पल पल बदलते नज़र आ रहे हैं। लोकतंत्र बचाने, क्लब में नई क्रांति लाने जैसे शब्दों का सहारा लेकर जैसे तैसे उभरा प्रोग्रेसिव ग्रुप फिर से डांवा डोल होता नज़र आ रहा है।
मंगलवार शाम को क्रांतिकारी भाषणों के साथ प्रोग्रेसिव ग्रुप के ऐलान के बाद और नामांकण से ठीक पहले विपन झांजी के ऑनरेरी सैक्रेटरी पद पर चुनाव न लड़ने के फैसले ने सभी के एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है।
सवाल उठने लगे हैं कि प्रोग्रेसिव ग्रुप चुनाव तिथि तक पहुंच पाएगा या नहीं। जिस तरीके से पल-पल, हर दिन समीकरण बदल रहे हैं, ऐसे हालात से अनुमान लगाया जा सकता है कि… पिक्चर अभी बाकी है।
अगर कहा जाए कि आने वाले दिनों में कुछ और विकेट गिर सकतें हैं तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
दरअसल में मंगलवार शाम को प्रैस कान्फ्रेंस में प्रोग्रेसिव के चुनाव लड़ने और केंडीडेट के ऐलान के बाद से पहली बार चुनाव लड़ रहे केंडीडेट में तो एनर्जी दिखी, लेकिन प्रैस कान्फ्रेंस में मौजूद ग्रुप के वरिष्ठ सदस्यो में एनर्जी नहीं दिखी।
प्रैस कान्फ्रेंस में ऐलान किया गया कि प्रोग्रेसिव फिर से एक्टिव हैं। कहा गया कि ग्रुप के अहम स्तंभ नरेश तिवाड़ी, अश्वनी खौसला पप्पू कुछ देर में प्रैस कान्फ्रेंस में आ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
नरेश तिवाड़ी, अश्वनी खौसला पप्पू के वहां न पहुंचने से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रोग्रेसिव फिलहाल पूरी तरह से एक्टिव नहीं है। विक्की पुरी कनाडा में हैं ।
विक्की पुरी, नरेश तिवाड़ी, पप्पू खौसला की गैर मौजूदगी से मंगलवार शाम से ही सवाल उठ रहे थे कि प्रोग्रेसिव के इन धुरंधरों के बिना क्या प्रोग्रेसिव अपनी प्रोग्रेस दिखा पाएगी?
प्रोग्रेस तो फिलहाल नज़र नहीं आई, लेकिन अचानक विपन झांजी का बैकफुट पर चले जाना अपने आप में प्रोग्रेसिव के लिए खासा झटका है।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ग्रुप के कई केंडीडेट भी निजि व्यस्तताओं के वास्ता देकर पतली गली से निकल सकते हैं।
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