
Prabhat Times
जालंधर। जिमखाना क्लब चुनाव इस बार सस्पेंस से भरपूर बने हुए हैं। हॉलीवुड मूवी की तरह हर पल बड़े बड़े और समझ से परे बदलाव हो रहे हैं। खैर, जैसे जैसे मतदान का दिन नज़दीक आ रहा है, पत्ते खुलते जाएंगे।
लेकिन मौजूदा हालात मुताबिक एक बात तय है कि प्रोग्रेसिव के लिए रास्ता आसान नहीं होगा। बेशक क्लब के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित सदस्य दलजीत छाबड़ा ने दिन रात जोर लगाकर टीम दोबारा तैयार की।
कार्यकारिणी में नए और युवा चेहरों को मौका दिया, लेकिन चुनावों में समय कम और खासकर प्रोग्रेसिव ग्रुप की ‘धुरंधर’ साथ न होने के कारण रास्ता कठिन है।
अगर कहें कि आने वाले दिनों में प्रोग्रेसिव को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चुनाव प्रचार, भागदौड़ ये सब तो ठीक, लेकिन प्रोग्रेसिव के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी सभी कैंडीडेट को अपने साथ जोड़े रखना।
बता दें कि कई सालों से जिमखाना क्लब चुनावों में ओपोजिट चुनाव लड़ने वाले प्रोग्रेसिव और अचीवर्ज़ इकट्ठे हो गए। अचीवर्ज़ ने अपने केंडीडेट घोषित किए तो प्रोग्रेसिव ग्रुप द्वारा उन्हें समर्थन दे दिया।
प्रोग्रेसिव ग्रुप के चेयरमैन कमल शर्मा कोकी ने प्रैस स्टेटमेंट दी कि इन चुनावों में प्रोग्रेसिव चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे और वे स्वयं भी चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे।
खैर, प्रेस स्टेटमेंट में चेयरमैन कोकी शर्मा ने स्पष्ट कर दिया था कि प्रोग्रेसिव चुनाव नहीं लड़ेंगे।
इसके पश्चात प्रोग्रेसिव ग्रुप के प्रमुख स्तंभ विक्की पुरी ने भी स्टेटमेंट में स्पष्ट किया कि प्रोग्रेसिव का ये फैसला किसी दबाव में में नहीं लिया गया।
विक्की पुरी ने स्पष्ट किया कि क्लब चुनावों के कारण सदस्यों के लिए सैकेंड होम जिमखाना क्लब में आपसी दूरियां बढ़ती दिख रही थी।
क्लब की बेहतरी और सदस्यों में भाईचारक सांझ के मद्देनज़र प्रोग्रेसिव ग्रुप ने चुनावो में हिस्सा न लेने का फैसला लिया गया था।
पॉजिटिव सोच को नैगेटिव बना कर किया गया प्रचार
प्रोग्रेसिव के विक्की पुरी, नरेश तिवाड़ी, पप्पू खौसला, कोकी शर्मा ने पॉजिटिव सोच के साथ चुनावों से अलग हटने का फैसला किया ताकि क्लब के सभी सदस्य एकजुट रहें। और क्लब सैकेंड होम ही रहे।
लेकिन प्रोग्रेसिव का ये फैसला कुछ लोगों को रास नहीं आया। क्योंकि प्रोग्रेसिव-अचीवर्ज़ के इकट्ठे होने पर कई लोगों को अपनी रोटियां बंद होती दिखने लगी। यही कारण रहा कि ऐसे लोगो ने पॉजिटिविटी को नैगेटिविटी में बदल दिया।
बार बार फोन कर के, क्लब में बात-बात पर लोकतंत्र जैसे भारी भरकम और इमोनशनल शब्दों का सहारा लेकर क्लब के वरिष्ठ सदस्यों का माइंड वॉश किया।
चुनावों एक तरफा होने से निजि हित पूरे न होते देख कुछ लोग खुद तो आगे नहीं आए लेकिन चिंगारी को हवा दे दी।
कोकी शर्मा का यू-टर्न, शायद ये है वजह
जिमखाना क्लब में कमल शर्मा कोकी का खासा रूतबा है। प्रोग्रेसिव ग्रुप के चेयरमैन के तौर पर उन्होने कई चुनाव लड़े और जीते। लेकिन इस बार प्रोग्रेसिव द्वारा चुनाव घोषित होने से पहले आपसी बातचीत कर चुनाव न लड़ने का फैसला किया।
कोकी शर्मा ने प्रैस ब्यान भी दिए। लेकिन इसके पश्चात वे फिर से यू-टर्न ले गए। हालांकि कोकी शर्मा ने इसके बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन कोकी शर्मा के नज़दीकी सूत्रों का कहना है कि कोकी शर्मा कभी अपनी बात से पीछे नहीं हटते, लेकिन इस बार कुछ लोगों ने उन्हें इमोशनल किया गया। जिस कारण वे फिर से ग्रुप से जुड़े।
‘मैन ऑफ हिज वर्ड” हैं विक्की पुरी
इस सारे एपिसोड में प्रोग्रेसिव के स्तंभ विक्की पुरी कनाडा में हैं। अपनी रोटियां सेंक रहे कई लोगों ने उन्हें बार बार फोन करके दोबारा प्रोग्रेसिव को एक्टिव करने की बात कही।
उन्हें वापस आने के लिए भी हर तरह से मनाने की कोशिश की गई। लेकिन विक्की पुरी ने कहा कि ग्रुप ने जो फैसला लिया है, वे उसी पर कायम है। उन्होने एक बार सभी से जुबान कर दी है, वे अब पीछे नहीं हट सकते।
इन ‘धुरंधरो’ के बिना प्रोग्रेसिव की राह बेहद कठिन
किसी की बातों में आकर, इमोशनल होकर ग्रुप तो बना, कैंडीडेट का ऐलान भी हुआ, लेकिन हालात मुताबिक प्रोग्रेसिव के ‘धुरंधर’ विक्की पुरी, नरेश तिवाड़ी, पप्पू खोसला के बिना चुनावी रास्ता बेहद कठिन है।
प्रोग्रेसिव ग्रुप के केंडीडेट का ऐलान किए जाने के बाद से सवाल उठने शुरू हो गए थे कि ग्रुप के ‘धुरंदरों’ के बिना क्या प्रोग्रेसिव पिछले चुनावों की तरह प्रोग्रेस दिखा पाएगा?
हुआ भी यही, प्रोग्रेस तो अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि विपन झांजी ऑनरेरी सैक्रेटरी पद से चुनाव लड़ने से पीछे हट गए।
अब प्रोग्रेसिव द्वारा पहले ग्रुप में न लिए गए आजाद केंडीडेट विजय सहदेव को ही समर्थन देने का फैसला पर विचार विमर्श कर रहा है।
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