



Prabhat Times
नई दिल्ली। होर्मुज में फंसे तेल के जहाजों और ईरान अमेरिका की लड़ाई के बीच कई खबरें थी कि ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल (petrol prices) की कीमतें आसमान छूने वाली हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों को देखते हुए आम जनता के बीच एक डर और पैनिक का माहौल बन गया था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन तमाम खबरों और कयासों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है।
सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि देश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। फ़िलहाल सरकार पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं करने वाली है.
अफवाहों से बचने की सलाह
सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल की खबरें न केवल गलत हैं, बल्कि भ्रामक और शरारतपूर्ण भी हैं।
सरकार के मुताबिक, इस तरह की खबरें जानबूझकर नागरिकों के बीच डर और घबराहट पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं।
मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और पैनिक न हों।
सरकार ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तेल की कीमतें बढ़ाने की उनकी कोई योजना नहीं है।
4 साल से नहीं बढे हैं दाम
भारत के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है कि पिछले 4 सालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई युद्ध और आर्थिक संकट आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत शायद दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में ईंधन के दाम नहीं बढ़े हैं।
जब दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे थे, तब भारत सरकार ने अपनी नीतियों के जरिए घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखा।

नागरिकों को बचाने के लिए कड़े कदम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका सीधा असर स्थानीय कीमतों पर पड़ता है।
हालांकि, भारत सरकार और सरकारी तेल कंपनियों (Oil PSUs) ने मिलकर पिछले कुछ वर्षों में कई अथक प्रयास किए हैं ताकि आम आदमी को इस वैश्विक महंगाई से बचाया जा सके।
सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव और तेल कंपनियों के नुकसान को खुद वहन करके यह सुनिश्चित किया है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तेज बढ़ोतरी का बोझ सीधा भारतीय नागरिकों की जेब पर न पड़े।
यह एक तरह का ‘सुरक्षा कवच’ है जो सरकार ने वैश्विक अस्थिरता के बीच अपने नागरिकों को प्रदान किया है।
होर्मुज संकट और भारत की रणनीति
वेस्ट एशिया, विशेष रूप से होर्मुज जलसंधि में जारी तनाव की वजह से तेल की सप्लाई चेन पर काफी दबाव है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल का व्यापार करता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए यहाँ चिंता होना स्वाभाविक था।
लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) मौजूद हैं और वह वैकल्पिक रास्तों तथा विभिन्न देशों के साथ तेल के समझौतों पर काम कर रही है।
अमेरिका द्वारा ईरान और रूसी तेल पर दी गई हालिया छूट (Waivers) ने भी भारत की स्थिति को कुछ राहत प्रदान की है।
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