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बठिंडा। सीमित संसाधनों, आर्थिक चुनौतियों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद अगर हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो बड़े से बड़ा सपना भी साकार हो सकता है।

बठिंडा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले चार होनहार विद्यार्थियों ने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक जेईई एडवांस 2026 को क्वालीफाई कर यह साबित कर दिया है।

इन विद्यार्थियों की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण और वंचित परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं।

इनमें से अधिकांश छात्र ऐसे परिवारों से आते हैं जहां माता-पिता मजदूरी, खेती या छोटे-मोटे कार्यों से परिवार का गुजारा करते हैं। अब यही बच्चे अपने परिवारों में इंजीनियर बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ा चुके हैं।

इस सफलता के पीछे एचएमईएल गुरू गोबिंद सिंह रिफाइनरी और सेंटर फॉर सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड लीडरशिप (सीएसआरएल), दिल्ली का नेशनल सुपर 100 प्रोग्राम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस पहल के तहत चयनित विद्यार्थियों को 11 माह की पूर्णतः निशुल्क रेजिडेंशियल कोचिंग, आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी प्रतिभा के सपनों में बाधा न बने।

इन छात्रों ने हासिल की सफलता

जेईई एडवांस क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों में अनमोलप्रीत सिंह (शहीद संदीप सिंह सरकारी स्कूल, परस राम नगर), अभय सामा (मैरिटोरियस स्कूल, बठिंडा), प्रभजोत सिंह (सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भुच्चो मंडी) तथा किशना बाई (मैरिटोरियस स्कूल, बठिंडा) शामिल हैं।

इन विद्यार्थियों का चयन वर्ष 2025 में आयोजित नेशनल सुपर 100 प्रवेश परीक्षा के माध्यम से हुआ था।

चयन के बाद उन्हें दिल्ली स्थित सीएसआरएल केंद्र में भेजा गया, जहां देश के अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में जेईई मेन्स और एडवांस की तैयारी करवाई गई।

संघर्षों के बीच चमकी प्रतिभा

फाजिल्का के गांव जंडवाला निवासी अभय सामा बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर पाएंगे।

पिता गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और परिवार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनकी माता के कंधों पर है।

मात्र एक एकड़ भूमि वाले परिवार के लिए महंगी कोचिंग संभव नहीं थी। ऐसे में सुपर 100 प्रोग्राम उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आया।

वहीं गांव पुहली के प्रभजोत सिंह का सपना भी इंजीनियर बनने का था, लेकिन आर्थिक अभावों के कारण कोचिंग लेना संभव नहीं था।

मजदूरी करने वाले पिता के बेटे प्रभजोत ने ऑनलाइन आवेदन कर परीक्षा दी और चयनित होकर दिल्ली में निशुल्क कोचिंग प्राप्त की। आज वह अपने परिवार में इंजीनियरिंग की राह पर बढ़ने वाला पहला सदस्य बनने जा रहा है।

अनमोलप्रीत सिंह की कहानी भी प्रेरणादायक है। परस राम नगर के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अनमोलप्रीत को शुरुआत में यह जानकारी भी नहीं थी कि इंजीनियरिंग के लिए जेईई जैसी परीक्षा होती है।

स्कूल में आयोजित सुपर 100 टेस्ट में भाग लेने के बाद उनका चयन हुआ और दिल्ली में देशभर से आए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के बीच पढ़ने का अवसर मिला।

इससे उनका आत्मविश्वास और ज्ञान दोनों बढ़े। अब उनका सपना प्रतिष्ठित एनआईटी से इंजीनियरिंग करने का है।

शिक्षा के माध्यम से बदल रही जिंदगी

एचएमईएल ने वर्ष 2022 में सीएसआरएल के साथ साझेदारी कर नेशनल सुपर 100 प्रोग्राम की शुरुआत की थी।

इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को आईआईटी, एनआईटी और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों तक पहुंचाने में सहयोग देना है।

इस पहल के माध्यम से पहले भी कई विद्यार्थी आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी खड़गपुर, एनआईटी जालंधर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त कर चुके हैं।

अब बठिंडा के इन चार विद्यार्थियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण भारत की प्रतिभाएं किसी से कम नहीं हैं।

इन विद्यार्थियों की उपलब्धि न केवल उनके परिवारों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शिक्षा और अवसर का संगम किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है।

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