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  • सुखबीर सिंह बादल श्री अकाल तख्त साहिब पर माफी मांगने गए, लेकिन बाहर आकर मुकर गए: मुख्यमंत्री
  • पंजाब के लोग जानते हैं कि सुखबीर ने श्री अकाल तख्त साहिब के खिलाफ साजिश रची और वहां झूठ बोलने गए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

नई दिल्ली/चंडीगढ़। जनविश्वास और राजनीतिक आचरण के बीच स्पष्ट अंतर को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल, जिसे पहले ही जनता की अदालत में खारिज किया जा चुका है, अब परमात्मा की अदालत में भी बेनकाब हो चुका है।

उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के विरोधाभासी बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पर माफी मांगते समय उन्होंने कुछ और कहा, जबकि बाद में अपने बयान से मुकर गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग भली-भांति समझते हैं कि यह सब पवित्र संस्था की गरिमा को कमजोर करने की कोशिश है।

धार्मिक प्राधिकार और बेअदबी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है। उन्होंने बेअदबी की किसी भी घटना के खिलाफ सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक विधायी कार्रवाई करने का भी ऐलान किया।

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है। उन्होंने कहा कि हर पंजाबी, विशेषकर सिख, इसके सामने शीश झुकाता है और इसके हर आदेश को अंतिम मानता है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि सुखबीर सिंह बादल से कोई गलती हुई है, तो उन्हें स्थापित धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसे स्वीकार करना चाहिए, न कि इसकी प्राधिकरण को कमजोर करने का प्रयास करना चाहिए।

बेअदबी विरोधी कानून के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान से जुड़े 2008 के कानून में संशोधन के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बैसाखी के पवित्र अवसर पर बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधनों को लेकर संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श जारी है, ताकि एक प्रभावी और सख्त कानून तैयार किया जा सके।

 

 

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