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New Delhi नई दिल्ली। भारत सरकार ने WhatsApp समेत सभी मैसेजिंग ऐप्स को लेकर बड़ा कदम उठाया है.

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग यानी DoT के नए नियम के बाद अब WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर यह अनिवार्य होगा कि जैसे ही फोन से SIM कार्ड निकाला जाए वैसे ही अकाउंट की चैट और कॉलिंग सर्विस बंद हो जाए, यानी लॉग आउट हो जाए.

नए नियम में यह भी है कि कंप्यूटर पर WhatsApp Web या दूसरे मैसेजिंग वेब का इस्तेमाल करने वालों को हर 6 घंटे में फिर से री-ऑथेंटिकेशन यानी लॉगिन करना होगा.

इस नियम का सबसे बड़ा असर दुबई, कतर, कनाडा समेत दूसरे देशों में रहने या घूमने जाने वाले लोगों पर पड़ेगा.

90 दिनों का है समय

DoT ने इन सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे अब यूजर्स को अपने डिवाइस में एक्टिव सिम कार्ड के बिना अपनी सेवाओं का इस्तेमाल करने से रोकें.

सरकार के नए नियमों के तहत मैसेजिंग ऐप्स अब केवल उसी डिवाइस पर चल पाएंगे जिसमें एक्टिव SIM कार्ड मौजूद होगा.

भारत सरकार के नए नियम के तहत इन ऐप्स को 90 दिनों के अन्दर यह तय करना होगा कि यूजर के सिम कार्ड लगातार उनकी सर्विस से जुड़े रहें.

भारत सरकार ने यह नियम यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लाया है लेकिन कई स्थितियों में यह यूजर्स की परेशानी का कारण भी बन सकता है.

खासकर उन इलाकों में जहां नेटवर्क कमजोर रहता है या फिर बार-बार गायब हो जाता है.

नए नियम से मीडिया समेत दूसरे संस्थानों में काम करने वाले लोगों पर पड़ेगा जो लंबे समय तक अपने डेस्कटॉप पर WhatsApp Web यूज करते हैं.

आइए जानते हैं कि DoT के इस नए नियम से किन यूजर्स को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और उनको क्या परेशानी हो सकती है.

इन ऐप्स के यूजर्स को भी होगी दिक्कत

भारत सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए बड़ा आदेश जारी किया है, जो देश में करोड़ों यूजर्स के ऐप इस्तेमाल करने के तरीके को बदल सकता है.

अब WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप बिना एक्टिव SIM कार्ड के काम नहीं कर सकेंगे.

दूरसंचार विभाग (DoT) ने यह नियम Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत लागू किया है.

प्रवासी भारतीयों की भी बढ़ेगी मुसीबत

DoT का नया नियम प्रवासी भारतीयों के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है. अब दुबई, कतर, कनाडा जैसे देशों में रह रहे भारतीय यूजर्स को अपना भारतीय WhatsApp नंबर नहीं चला सकेंगे.

नेटवर्क बदलते ही अकाउंट बार-बार वेरिफिकेशन मांगेगा और अकाउंट लॉग आउट हो जाएगा.

ऐसे में विदेश में रहकर भारतीय नंबर से WhatsApp चलाने वालों के लिए यह नियम अचानक एक बड़ा झटका साबित हो सकता है.

SIM बदलने पर मुसीबत

अगर कोई यूजर डुअल-SIM सेटअप में SIM स्वैप करता है या SIM खो जाने पर तुरंत दूसरा SIM लेता है तो उनका मैसेजिंग एक्सेस कुछ समय के लिए रुक सकता है.

यह कदम चोरी या फ्रॉड की स्थिति में तुरंत सुरक्षा तो देता है लेकिन नार्मल यूजर को परेशान कर सकता है.

दफ्तरों पर बड़ा असर

कॉल सेंटर, मीडिया हाउस या कॉर्पोरेट एम्पलाई जो लगातार घंटों तक WhatsApp Web का यूज करते हैं उन्हें अब हर 6 घंटे में मोबाइल से QR कोड स्कैन करके या किसी दूसरे तरीके से फिर से लॉगिन करना होगा. हर दिन बार बार लॉगिन करना यूजर्स को परेशान कर सकता है.

इन लोगों को ही सबसे ज्यादा परेशानी

नए नियम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर होगा जहां नेटवर्क पहले से ही कमजोर रहता है या बार-बार गायब हो जाता है.

ऐसे में जैसे ही फोन में सिग्नल ड्रॉप होगा या नेटवर्क कुछ समय के लिए गायब होगा ऐप वेरिफाई नहीं कर पाएगा और तुरंत लॉग आउट हो सकता है.

ग्रामीण इलाकों, पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती जिलों और उन यूजर्स को सबसे ज्यादा समस्या होगी जहां अक्सर नेटवर्क फ्लक्चुएशन की समस्या रहती है.

सबसे बड़ा सवाल WhatsApp यह कैसे लागू करेगा?

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी तक WhatsApp के पास ऐसा कोई फीचर नहीं है जिससे वह सिम की एक्टिविटी चेक कर सके.

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि WhatsApp इस सरकारी आदेश को कैसे लागू करेगा.

अगर WhatsApp इस नए नियम को लागू करता है तो उसे अपने ऐप में एक नया प्रोटोकॉल जोड़ेना होगा जो लगातार डिवाइस के IMSI (International Mobile Subscriber Identity) डेटा या SIM की एक्टिविटी को चेक करेगा.

टेलीकॉम बनाम टेक कंपनियां

DoT का नया नियम केवल यूजर्स की सेफ्टी के लिए नहीं है बल्कि भारत के टेलीकॉम इकोसिस्टम में भी इसका बड़ा असर होगा.

सरकारी एजेंसी हमेशा मैसेजिंग ऐप्स पर कंट्रोल रखना चाहती हैं, जिससे आतंकवाद, बाल पोर्नोग्राफी जैसी चीजों पर नकेस कसा जा सके.

यह कदम मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनी ढांचे के साथ और ज्यादा मजबूती से जोड़ने का प्रयास है.

वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि बार-बार की होने वाली इस परेशानी से यूजर SMS और पुराने वॉयस कॉलिंग पर वापस लौट सकते हैं जिससे भारत की टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व में वृद्धि हो सकती है.

DoT का यह नियम यूजर की सेफ्टी के लिए एक बड़ा कदम तो जरूर है लेकिन यह यूजर्स के लिए एक नई डिजिटल जिम्मेदारी लेकर आया है. अब देखना यह है कि WhatsApp जैसी दिग्गज कंपनी इसे कैसे लागू करती हैं.

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