




Prabhat Times
New Delhi नई दिल्ली। (supreme court rejects claim for hiding alcohol addiction while buying insurance) अगर आप अक्सर शराब पीते हैं तो इस आदत की वजह से ज्यादा खर्च करने के लिए तैयार रहें।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि अगर कोई शख्स इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय अपनी शराब पीने की जानकारी नहीं देता तो ऐसी बीमारी जो शराब पीने की वजह से हो सकती है, तो इसके इलाज से जुड़े दावों को इंश्योरेंस कंपनी रिजेक्ट कर सकती है।
दरअसर शराब और तंबाकू से जुड़ी आदतों को लेकर इंश्योरेंस कंपिनयों के नियम काफी सख्त हैं और ऐसे लोग पॉलिसी जारी करे के कंपनियां अधिक प्रीमियम की मांग कर सकती हैं।
कई बार लोग प्रीमियम बचाने के लिए ऐसी आदतों की पॉलिसी में छुपा दिते हैं. हालांकि अब कोर्ट के आदेश के बाद कंपनियां ऐसे मामलों में दावों को खारिज कर सकती हैं.
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा ‘जीवन आरोग्य’ योजना के तहत एक पॉलिसीधारक के अस्पताल में भर्ती होने पर हुए खर्च की भरपाई न करने के फैसले को सही बताते हुए कहा कि शराब की लत की जानकारी देना जरूरी है.
एलआईसी ने यह तर्क दिया कि पॉलिसीधारक ने अपने शराब सेवन की आदत को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था.
क्या था मामला?
इस केस में एक व्यक्ति ने 2013 में ‘जीवन आरोग्य’ पॉलिसी खरीदी थी.
पॉलिसी के तहत पॉलिसीधारक नॉन-आईसीयू में भर्ती होने पर ₹1,000 प्रति दिन और आईसीयू में भर्ती होने पर ₹2,000 प्रति दिन का खर्च एलआईसी को अस्पताल को देना था.
पॉलिसी खरीदने के एक साल बाद, उसे गंभीर पेट दर्द के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और एक महीने के भीतर उसकी मृत्यु हो गई.
पॉलिसीधारक की पत्नी ने LIC से क्लेम दायर किया. लेकिन LIC ने दावा खारिज कर दिया. LIC ने कहा कि मृतक ने अपने लंबे समय से चले आ रहे शराब की लत के बारे में जानकारी छिपाई थी.
एलआईसी ने ‘जीवन आरोग्य योजना’ के क्लॉज 7(xi) का हवाला देते हुए कहा कि यह योजना “आत्म-नुकसान, आत्महत्या का प्रयास और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों या शराब के उपयोग या दुरुपयोग तथा उससे उत्पन्न जटिलताओं” को कवर नहीं करती है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मृतक की पत्नी ने पहले उपभोक्ता फोरम का रुख किया, जिसने एलआईसी को मेडिकल खर्च की भरपाई करने का निर्देश दिया.
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के आदेश से असहमति जताई.
अदालत ने कहा कि “मृतक की शराब की लत एक पुरानी समस्या थी, जिसे उसने बीमा खरीदते समय जानबूझकर छिपाया था.”
चूंकि उसने महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी, इसलिए LIC का दावा अस्वीकार करना उचित था.
क्या करें आप
पहले तो सेहत को प्राथमिकता दें और शराब पीने पर नियंत्रण करें.
अगर आप शराब पीते है तो पॉलिसी लेते वक्त पूरी जानकारी सामने रखें. इससे आप आगे किसी बड़ी समस्या से बच जाएंगे.
संभव है कि आपकी आदत से आपका प्रीमियम बढ़ जाए,
दरअसल शराब बीमार होने का जोखिम बढ़ाती है जिससे शराब पीने वालों को जल्द और बारबार इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
इसी जोखिम को देखते हुए इंश्योरेंस कंपनियां अपनी नीतियां सख्त रखती है.
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