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  • भाजपा की भक्ति में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने  देश के साथ गद्दारी की है – मनीष सिसोदिया
  • ज्ञानेश कुमार ने मोदी जी के साथ मिलकर देश भर का चुनाव लूटने का अपराध किया है – संजय सिंह
  • एसआईआर के तहत दिल्ली में हर तीसरे वोटर को फर्जी बता 47 लाख वोट काट दिए गए- संजय सिंह
  • सारा विपक्ष जनता के साथ सड़क पर उतरे और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करे – सौरभ भारद्वाज
  • मोदी जी जन तंत्र के वोट से नहीं, तंत्र की लूट की वजह से चुनाव जीत रहे हैं – गोपाल राय
  • भाजपा की कठपुतली बन चुके ज्ञानेश कुमार में शर्म बची है तो तुरंत इस्तीफा दे दें- अनुराग ढांडा

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में देश में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हुए विस्फोटक खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग कर दी है।

वरिष्ठ नेता और पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि लोकतंत्र के हत्यारे ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार आज के वोटर और आज के भारत के गद्दार हैं और सिर्फ आज के भारत के ही नहीं, बल्कि ज्ञानेश कुमार बाबा साहब अंबेडकर की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और महात्मा गांधी, सबके साथ गद्दारी कर रहे हैं।

इन महापुरुषों ने लड़कर और अपनी जान पर खेलकर लोगों को वोट देने का अधिकार दिलवाया था, जिसे ज्ञानेश कुमार ने भाजपा के हक और दबाव में बेच दिया है।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि ज्ञानेश कुमार के साथी चुनाव आयुक्तों ने 14 बार ऑब्जेक्शन किया कि नए वोटर कैसे जोड़े जाएंगे, वोटर लिस्ट में नाम कैसे काटे जाएंगे और वोटर लिस्ट पर कंट्रोल किसका होगा।

ज्ञानेश कुमार जो कुछ कर रहे थे, उस पर उनके साथियों ने 14 बार ऑब्जेक्शन किया, लेकिन भाजपा के चक्कर में ज्ञानेश कुमार ने किसी की नहीं सुनी।

अगर ज्ञानेश कुमार को भाजपा की इतनी ही भक्ति करनी है, तो उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा देकर भाजपा और नरेंद्र मोदी जी का इलेक्शन सेल ज्वाइन कर लेना चाहिए और उसका चीफ बन जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर बनकर भारत को बदनाम न करें और भारत के साथ गद्दारी न करें।

उधर, वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पहले दिन से हम लोग कह रहे हैं कि एसआईआर एक फ्रॉड प्रक्रिया है जो भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के इशारे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चला रहे हैं।

अब वह बात सच साबित हो गई है। अब सवाल सिर्फ विपक्ष के विरोध का नहीं है, बल्कि ज्ञानेश कुमार के साथ बैठे हुए उन दो चुनाव आयुक्तों के विरोध का मामला भी अब सामने आ गया है। वे चुनाव आयुक्त भी वही बातें कर रहे हैं जो हम लोगों ने उठाई थीं।

चुनाव आयोग ने बंगाल के अंदर 27 लाख वोटर उड़ा दिए तो वहां चुनाव का मतलब क्या बचा? सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि अगली बार वोट दे देना।

अब जब पूछा जा रहा है, तो चुनाव आयोग कह रहा है कि 1 लाख 26 हजार मामलों की सुनवाई हुई, जिसमें से 93 फीसद ठीक पाए गए।

इसका मतलब है कि ज्ञानेश कुमार ने जानबूझकर वोट काटने का अपराध किया है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए।

संजय सिंह ने आगे कहा कि बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र या बिहार हो, जहां-जहां यह फ्रॉड हुए हैं, वहां सारे चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द कर दोबारा होने चाहिए।

चुनाव आयोग ने दिल्ली के अंदर अरविंद केजरीवाल की विधानसभा नई दिल्ली में 40 हजार वोट काट दिए, जिससे केजरीवाल 3 से 3.5 हजार वोट से चुनाव हार गए।

इसका मतलब तो फिर कोई चुनाव बचा ही नहीं। ऐसे ही दिल्ली में टारगेट करके चुनाव आयोग ने अलग-अलग विधानसभाओं में वोट काट दिए। अभी चुनाव आयोग ने दिल्ली में 47 लाख वोट उड़ा दिए, क्या दिल्ली में हर तीसरा वोटर फर्जी है?

संजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग ने देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को नोटिस भेज दिया। कपिल सिब्बल चुनाव लड़ चुके हैं, उन्हें नोटिस भेज दिया।

सेना के पूर्व प्रमुख को नोटिस भेज दिया। अरविंद केजरीवाल तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उनको और उनके परिवार को नोटिस भेज दिया।

चुनाव आयोग ने मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, खुद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु, विदेश मंत्री और विदेश सचिव को भी नोटिस भेज दिया।

ज्ञानेश कुमार की यह कौन सी प्रक्रिया है और यह कौन सा गहन पुनरीक्षण चल रहा है, यह तो सीधे तौर पर दादागिरी की जा रही है।

ज्ञानेश कुमार चुनाव लूटने के सबसे बड़े अपराधी हैं। इन्होंने मोदी जी के साथ मिलकर देश भर का चुनाव लूटा है, इसलिए इन्हें गिरफ्तार करके जेल में डालना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार की देखरेख में देश भर में अब तक जो भी चुनाव संपन्न हुए हैं और जहां-जहां लूट हुई है, वे सारे चुनाव रद्द होने चाहिए।

वहीं, “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ज्ञानेश कुमार से मेरी दो बार मुलाकात हुई है।

एक बार हम लोग एयरपोर्ट के लाउंज में साथ थे और जितनी मैंने बात की थी, उस वक्त ज्ञानेश कुमार कोऑपरेटिव विभाग में थे और पूर्णतः सरकार के चमचे थे। बातचीत करके मुझे इतना समझ में आ गया था।

उसके बाद केंद्र सरकार ने अपने यस मैन को इलेक्शन कमिश्नर बना दिया। इसमें गलती सुप्रीम कोर्ट की है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को उस वक्त कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहना चाहिए था कि सरकार कैसे तय कर लेगी कि कौन इलेक्शन कमिश्नर बनेगा। यह तो एक बहुत ही न्यूट्रल तरीके से तय होना चाहिए।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में एसआईआर की जो पूरी की पूरी प्रक्रिया हो रही है, इसमें खुल्लम-खुल्ला धांधली हो रही है।

चुनाव आयोग ने एक-तिहाई लोगों को वोट से ही वंचित करके खत्म कर दिया है। चुनाव आयोग ने पूरे देश में 13 करोड़ लोगों के वोट काट दिए हैं और यह प्रक्रिया अभी भी चल रही है।

कोई चुनाव आयोग से सवाल नहीं पूछ सकता और अगर लोग कोर्ट में भी जाते हैं, तो वहां से भी कोई रिलीफ नहीं मिलता है।

मुझे लगता है कि अब देश की जनता को सड़क पर उतरना पड़ेगा। जब तक देश की जनता सड़क पर नहीं उतरेगी और तमाम विपक्षी पार्टियां अपने छोटे-छोटे लड़ाई-झगड़े भूलकर साथ नहीं आएंगी, तब तक इस इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को जेल नहीं भेज पाएंगे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को जेल नहीं भेजा गया, तो यह देश छोड़कर भाग जाएगा।

इसलिए सबको इकट्ठे आना है और इसे इंपीच कराना चाहिए। ज्ञानेश कुमार द्वारा कराए गए जितने भी चुनाव हैं, उन सभी चुनावों को रद्द कराना चाहिए और इस लड़ाई में सबको एक साथ आना चाहिए।

उधर, “आप” गुजरात के प्रभारी व दिल्ली के पूर्व मंत्री गोपाल राय ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

देश भर के चुनाव लूटने का यह अपराध अक्षम्य है। दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल में छल से हासिल की गई इन जीतों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

मोदी जी की यह जीत जनसमर्थन से नहीं, बल्कि तंत्र की लूट से आई है। ऐसे अधिकारियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने एक्स पर कहा कि अब ये सबूतों के साथ सबके सामने है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा की कठपुतली है।

अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी भी शर्म है तो उसे तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। और अगर शर्म नहीं है तो इसे हटा दिया जाना चाहिए। ये लोकतंत्र की सरेआम लूट है।

 

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