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नई दिल्ली। कनाडा में लंबे समय से वर्क परमिट पर रहने वाले लोगों को पक्की नागरिकता मिलने जा रही है।
कनाडा सरकार ने इन-कनाडा वर्कर्स इनिशिएटिव के तहत देश में पहले से रह रहे 33 हजार वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंस (PR) देने का फैसला किया है।
यह फैसला उन लोगों के लिए है जो कनाडा के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहकर वहां की इकोनॉमी में मदद कर रहे हैं।
कनाडा लेबर की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार ने फैसला किया है कि ग्रामीण व छोटे शहरों में काम करने वालों को नागरिकता दी जाएगी।
कनाडा की इमिग्रेशन मिनिस्टर लीना मेटलेज डायब ने जानकारी दी है कि बजट 2025 में किए गए वादे के मुताबिक, वर्क परमिट पर काम कर रहे लोगों को अब तेजी से पीआर दी जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि 2026 में कम से कम 20 हजार वर्कर्स को पीआर दिया जाए। 2027 में बाकी बचे हुए लोगों की प्रक्रिया पूरी की जाए।
मिनिस्टर ने बताया कि साल 2026 के पहले दो महीनों (जनवरी-फरवरी) में ही 3,600 लोगों को इस स्कीम के तहत पर्मानेंट रेसिडेंस मिल चुका है।
कनाडा सरकार की इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा फायदा पंजाब के उन लोगों को होगा जो कि कनाडा में लंबे समय से वर्क परमिट पर हैं और वो पीआर होने का इंतजार कर रहे हैं।
कनाडा सरकार इन्हें देगी PR
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इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा विभाग ने फैसला किया है कि उन्हीं लोगों को PR दिया जाएगा जो किसी छोटे समुदाय या ग्रामीण इलाके में कम से कम 2 साल से रह रहे हों। दो साल से कम वालों को पीआर नहीं मिलेगी।
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कनाडा उन्हीं को PR देगा जो कि प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP), अटलांटिक इमिग्रेशन प्रोग्राम, केयरगिवर पायलट या एग्री-फूड पायलट जैसे प्रोग्राम्स के जरिए पहले ही PR के लिए अप्लाई कर चुका हो। जिनका आवेदन पहले से ही सिस्टम (इन्वेंट्री) में है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
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सबसे राहत की बात यह है कि जो लोग इन शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें कोई नया फॉर्म भरने या एडिशनल एक्शन लेने की जरूरत नहीं है। IRCC (इमिग्रेशन विभाग) खुद पुराने पेंडिंग आवेदनों को तेजी से प्रोसेस करेगा। इससे आवेदनों का बैकलॉग (पेंडिंग काम) कम होगा और जो लोग वहां की सोसाइटी में घुल-मिल गए हैं, उन्हें वहां का पक्का निवासी बनने में आसानी होगी।
स्टूडेंट वीजा के मौके घटेंगे
कनाडा में पंजाबी स्टूडेंट और वर्कर सबसे बड़ी विदेशी आबादी हैं। 2025 में जिन भारतीय छात्रों के वीजा रिजेक्ट हुए थे, उनके लिए इस योजना में मिलाजुला सा असर देखने को मिल रहा है।
नई पॉलिसी के मुताबिक, स्टूडेंट वीजा के मौके घटेंगे, क्योंकि 2026 में केवल 1.55 लाख छात्रों को अनुमति दी जाएगी, जो 2025 के मुकाबले लगभग आधे हैं।
यानी अगर कोई पढ़ाई के रास्ते कनाडा में बसने की राह देख रहा है तो अब ये सफर मुश्किल होने वाला है।
वर्क परमिट वालों को राहत मिलेगी, क्योंकि जो पहले से कनाडा में काम कर रहे हैं, उन्हें अब PR में बदलने का सीधा रास्ता मिल सकता है।
हालांकि, नए वर्क परमिट पर आने वाले लोगों के लिए भी मुश्किल बढ़ी हैं, क्योंकि कनाडा सरकार ने वर्क परमिट देने के लक्ष्य में भी कमी की है।
PR देने का फैसला लेने के ये दो अहम कारण
लेबर शॉर्टेज दूर करना: कनाडा के ग्रामीण विकास सचिव बकले बेलांजर का कहना है- ग्रामीण और दूर-दराज के इलाके हमारी इकोनॉमी का केंद्र हैं।
वहां लेबर की काफी कमी है। इस पहल के जरिए सरकार 2 बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है। खेती, हेल्थकेयर और कंस्ट्रक्शन जैसे जरूरी सेक्टर में वर्कर्स की कमी को खत्म करना।
आबादी का संतुलन: सरकार चाहती है कि 2027 के अंत तक कनाडा में अस्थायी निवासियों की संख्या कुल आबादी के 5% से कम हो जाए। इसलिए अस्थायी तौर पर रह रहे लोगों को पक्का किया जा रहा है।
ऑफिशियल वेबसाइट से ट्रैकिंग हो रही
कनाडा सरकार इस पूरे मिशन की प्रोग्रेस को अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर ट्रैक कर रही है। इसे हर महीने अपडेट किया जाएगा, ताकि आवेदकों को पता चल सके कि कितने लोगों को पीआर मिल चुकी है।
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