



Prabhat Times
बठिंडा। बठिंडा के बलवंत गर्गी ऑडिटोरियम में रविवार शाम कला, संस्कृति और आध्यात्मिक भावों से ओत-प्रोत भव्य सांस्कृतिक संध्या ‘नृत्य अर्पण – ए कथक ऑफरिंग टू द डिवाइन’ का शानदार आयोजन किया गया।
प्रेरणा’स कथक नृत्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सौंदर्य, लय और भावाभिव्यक्ति के अद्भुत संगम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद कथक की विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य की गरिमा को मंच पर जीवंत कर दिया।
नृत्य प्रस्तुतियों में भाव, ताल, लय और तकनीकी उत्कृष्टता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अवसर पर असम से पधारे ख्यातिप्राप्त कलाकार कौशिक दत्ता (कथक) एवं लख्याजीत बरुआ (कथक एवं सत्रिया) की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं।
दोनों कलाकारों ने अपनी मोहक और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। सत्रिया और कथक के संगम ने कार्यक्रम को एक अनूठा आयाम प्रदान किया।
कार्यक्रम में प्रेरणा वालिवडेकर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत समूह और एकल नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
प्रस्तुति के माध्यम से भक्ति, सौंदर्य और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
इस अवसर पर कथक गुरु प्रेरणा वालिवडेकर ने कहा, ‘नृत्य अर्पण’ मेरे लिए केवल एक मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से दिव्यता को समर्पित एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा है।
हमारा प्रयास है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े और कथक जैसी महान परंपरा को आगे बढ़ाए।
विद्यार्थियों और अतिथि कलाकारों की प्रस्तुतियों ने इस संकल्प को सार्थक किया है। बठिंडा जैसे शहर में शास्त्रीय कला के प्रति इतना उत्साह देखना बेहद प्रेरणादायक है।”
उन्होंने कहा कि यह आयोजन कला साधना, अनुशासन और गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित है तथा भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा दिया जाता रहेगा।
‘नृत्य अर्पण’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से दिव्यता को समर्पित एक आध्यात्मिक अभिव्यक्ति के रूप में उभरा।
पूरे कार्यक्रम में ताल, लय, भाव और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, कला प्रेमी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
उपस्थित जनों ने इस भव्य आयोजन की सराहना करते हुए इसे बठिंडा की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करने वाला आयोजन बताया।
———————————————————


————————————–





