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जालंधर। हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग द्वारा प्लानिंग फोरम के तत्वावधान में वित्तीय प्रबंधन विषय पर पाँच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम (रूष्ठक्क) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ई-एसडीपी योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वित्तीय प्रबंधन की अवधारणाओं, व्यवसायिक वित्त तथा व्यावहारिक वित्तीय निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करना था।

यह कार्यक्रम मुख्य अतिथि श्री पी. के. वर्मा के समग्र मार्गदर्शन में संचालित एवं समन्वित किया गया, जिनकी योजनाबद्ध कार्यप्रणाली, समन्वय एवं निष्पादन ने पाँचों दिनों के सत्रों और गतिविधियों को सुचारु रूप से संपन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकनीकी सत्रों का संचालन श्री ऋषभ जैन, प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं एलएलएम प्रोफेशनल द्वारा किया गया, जिन्होंने वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर सैद्धांतिक स्पष्टता के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के दूरदर्शी नेतृत्व में किया गया, जिनके निरंतर सहयोग एवं प्रोत्साहन से कार्यशाला का सफल संचालन संभव हो पाया।

कार्यक्रम का कुशल आयोजन पीजी अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. शालू बत्रा द्वारा किया गया। साथ ही, फैकल्टी सदस्य श्रीमती ज्योतिका, सुश्री हरमनु एवं सुश्री श्रुति ने शैक्षणिक योजना एवं कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय योगदान दिया।

प्लानिंग फोरम के विद्यार्थियों—धरा, हिमानी, जया तथा अन्य छात्राओं जैसे मौली, तानिया और नीतिका—ने कार्यक्रम के समन्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने पंजीकरण, सत्रों की व्यवस्था एवं समग्र प्रबंधन में सहयोग प्रदान किया। छात्र समन्वयकों ने अनुशासन, समयबद्धता तथा प्रतिभागियों और संसाधन व्यक्तियों के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित किया।

पाँच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान वित्तीय प्रबंधन के प्रमुख विषयों को विस्तार से कवर किया गया, जिनमें व्यवसायिक वित्त, अच्छा एवं खराब ऋण, पूंजी संरचना, नकदी प्रवाह बनाम लाभ, स्थिर एवं परिवर्ती लागत, ब्रेक-ईवन विश्लेषण तथा कार्यशील पूंजी प्रबंधन शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त, पूंजी बजटिंग तकनीकों पर विशेष रूप से नेट प्रेजेंट वैल्यू पर चर्चा की गई। साथ ही, शेयर बाजार की कार्यप्रणाली, नियामक ढांचा, बैंकों की भूमिका, सरकारी बजट, सार्वजनिक व्यय, राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति, मंदी एवं आर्थिक सुस्ती जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला गया।

व्यावहारिक पहलुओं जैसे नकदी प्रवाह पूर्वानुमान, निवेशरण नीतियाँ, विविधीकरण, चक्रवृद्धि, धन सृजन, वित्तीय नैतिकता तथा करियर योजना पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

रिलायंस, जोमैटो एवं टाटा मोटर्स जैसे वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक एवं व्याख्यात्मक क्षमताओं को सुदृढ़ किया गया तथा सिद्धांत और व्यवहार के बीच संतुलन स्थापित किया गया।

यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में वित्तीय जागरूकता, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं नैतिक वित्तीय निर्णय लेने की योग्यता को विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ, जिससे उनके शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास को प्रोत्साहन मिला।

कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण एवं औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जो इसकी सफल पूर्णता का प्रतीक रहा।

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