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  • भाजपा  का मकसद अराजकता पैदा करनारानीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके: अमन अरोड़ा
  • पीएम  मोदी सेंट्रल एजेंसियों के बारे में सही थेआज ईडी और सीबीआई  भाजपा  के तोते हैं: अमन अरोड़ा
  • पंजाब पुलिस के पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांगने के बावजूदईडी स्पष्ट सबूत देने में नाकाम रही: अमन अरोड़ा
  • आप सरकार के कार्यकाल में एलट्स प्रोजेक्ट के लिए एक भी सीएलयू मंज़ूर नहीं हुआपिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा  सरकारों के समय 6 मंज़ूरियां दी गईं: अमन अरोड़ा
  • अगर जांच निष्पक्ष हैतो 2012 से इस विभाग में मंत्री रहे हर व्यक्ति से पूछताछ की जाए: अमन अरोड़ा

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आपपंजाब के प्रेसिडेंट और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडीपर निशाना साधते हुए कहा कि पक्के सबूत पेश करने के बजायसेंट्रल जांच एजेंसी बार-बार पत्रमीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस पहले ही एजेंसी से पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग चुकी हैलेकिन ईडी साफ और काम के सबूत देने में नाकाम रही है।

आप पंजाब के प्रदेश प्रधान अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि भाजपा  का मुख्य मकसद अराजकता पैदा करनाराजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके।

अमन अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सीबीआई  की जो बुराई की थीवह सही थीऔर आज ईडी और सीबीआई  “भाजपा  के तोते” बन गए हैं।

मीडिया से बात करते हुएआप पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ईडी की तरफ से पंजाब डीजीपी को बार-बार भेजे गए पत्रजिसमें सेक्शन 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग वाला ताजा पत्र भी शामिल हैभाजपा  की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार की ‘बदतमीज़ी और हताशा’ दिखाते हैं।

पंजाब पुलिस ने आरोपो के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रोनिक सबूत मांगने के लिए 28 अगस्त को ही ईडी को पत्र लिखा था।

आप प्रधान ने बताया कि पंजाब पुलिस ने ईडी को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब तक दी गई सामग्री अस्पष्ट है और रेड के दौरान ज़ब्त किए गए पूरे सबूतदस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाए ताकि सही जांच की जा सके।

ईडी को 1 सितंबर को ज़रूरी सामग्री के साथ एक ऑफिसर भेजने के लिए कहा गया थालेकिन ऐसा कोई ऑफिसर पेश नहीं हुआ।”

सेंट्रल एजेंसियों के कामकाज पर तंज कसते हुएअमन अरोड़ा ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने सीबीआई  को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था।

उन्होंने कहा, “आज मैं नरेंद्र मोदी की उस बात से 100% सहमत हूं। चाहे ईडी होसीबीआई  हो या दूसरी सेंट्रल एजेंसियांये सभी भाजपा  सरकार के तोतों की तरह काम कर रही हैं।”

अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी बिना किसी गड़बड़ी के साबित किए मीडिया में संजीव अरोड़ालाल चंद कटारूचक और आप नेताओं के नाम बिना कोई गलत काम साबित किए उछाल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने दोस्त गौरव धीर के ज़रिए उन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

मामले के फैक्ट्स बताते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि ऑल्ट प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ (सीएलयूके लिए छह बार मंज़ूरी दी गईलेकिन आप सरकार के समय में एक भी सीएलयू नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा, “17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंज़ूरी पिछली कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थी।”

कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच में कई बार बदले गएजिनमें से ज़्यादातर पिछली सरकारों के समय में किए गए।

अमन अरोड़ा ने कहा, “अगर ईडी ​​को लगता है कि ये मंज़ूरी और बदलाव गैर-कानूनी थेतो उसे पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिएन कि सिर्फ़ आप सरकार को टारगेट करना चाहिए।”

अमन अरोड़ा ने डेवलपर्स के लिए 25% लैंड ओनरशिप पॉलिसी पर ईडी के फोकस पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 2012 में अकाली-भाजपा  सरकार के समय शुरू हुई थी और 2025 में आप सरकार ने इसमें सुधार किया।

उन्होंने दावा किया, “आप सरकार ने पॉलिसी में बदलाव किया है और डेवलपर्स के लिए लाइसेंस और सीएलयू लेने के लिए 100% ज़मीन का मालिकाना हक होना ज़रूरी कर दिया हैजिससे पहले की गलत पॉलिसी ठीक हो गई है।”

अमन अरोड़ा ने मामले से जुड़ी एफआईआर पर ईडी के भरोसे पर भी सवाल उठाया और कहा कि संबंधित एफआईआर  को हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है।

उन्होंने पूछा, “अगर एफआईआर  ही रद्द कर दी गई हैतो ईसीआईआर का क्या आधार है?”

पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुएअमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी को मौजूदा सरकार को चुनकर निशाना बनाने के बजाय उस पूरे समय की जांच करनी चाहिएजब ये मंज़ूरियां और पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले लिए गए थे।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री सुखबीर सिंह बादलकैप्टन अमरिंदर सिंहतृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपकी जांच सच्ची हैतो सबकी जांच करें। 2012 के बाद जो भी जिम्मेदार रहे हैंउन्हें बुलाएंतभी सच्चाई सामने आएगी।”

गौरव धीर का नाम अपने साथ जोड़कर पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने की कोशिशों को खारिज करते हुएअमन अरोड़ा ने कहा कि उनकी दोस्ती का किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा, “गौरव कल भी मेरा दोस्त थाआज भी मेरा दोस्त है और कल भी मेरा दोस्त रहेगा।

अगर ईडी ​​के पास अमन अरोड़ा के खिलाफ कोई सबूत हैतो मुझ तक पहुंचने के लिए किसी और का नाम इस्तेमाल करने के बजायउन्हें सीधे अमन अरोड़ा से बात करनी चाहिए।”

अमन अरोड़ा ने प्रिंटइलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से भी अपील की कि वे खबर छापने से पहले ईडी के लगाए गए आरोपों को खुद से वेरिफाई करें और संबंधित आप नेताओं का पक्ष लें।

उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार छापने से इमेज खराब हो रही है और इससे प्रभावित लोग बदनामी के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर हो सकते हैं।

अमन अरोड़ा ने कहा, “यह जांच से भागने का मामला नहीं है। हम फैक्ट्स और सबूतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जांच का स्वागत करते हैं।

लेकिन सेलेक्टिव टारगेटिंगमीडिया लीक और कैरेक्टर एसेसिनेशन की कोशिशें सबूत का विकल्प नहीं हो सकतीं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा  की बड़ी रणनीति भ्रम पैदा करनाराजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई सरकार ठीक से काम न कर सके।

“पंजाब के लोग समझते हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा के पास गवर्नेंस और डेवलपमेंट पर कोई जवाब नहीं हैइसलिए वह डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना चाहती है।”

अमन अरोड़ा ने दोहराया कि अगर ईडी ​​के पास पक्के सबूत हैंतो उसे मांग के मुताबिक पंजाब पुलिस को सौंप देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैंतो पेश करें। जांच ठीक से होने दें। लेकिन सेलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की यह पॉलिटिक्स नहीं चलेगी।”

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