Prabhat Times
जालंधर। ऑनलाइन शॉपिंग में जालंधर के ग्राहक से हुई कथित ठगी के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है।
जालंधर के शिकायतकर्ता जतिन थापर की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने ऑनलाइन शॉपिंग में गलत उत्पाद भेजने पर उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मंत्रा डिजाइन लिमिटेड और श्रेयांश रिटेल प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया है।
उपभोक्ता ने दोनों को जूतों की कीमत 5399 रुपए वापस करने और 15 हजार मुआवजे व केस का खर्च देने का आदेश दिया है।
इस मामले में खास बात ये रही कि शिकायतकर्ता जतिन थापर ने उपभोक्ता आयोग में अपना केस खुद लड़ा। शिकायतकर्ता की तरफ से कोई वकील नहीं था। जतिन ने खुद ही उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा।
2024 में ऑनलाइन मंगवाए थे स्केचर्स के शूज़, लेकिन.. निकला कुछ और
जालंधर के संगत सिंह नगर निवासी जतिन थापर ने ऑनलाइन स्केचर्स के शूज 5399 रु. में खरीदे थे। मगर उसे डिलीवर गलत प्रोडक्ट हुआ। उसने तुरंत रिटर्न रिक्वेस्ट डाल दी।
कंपनी ने 22 सितंबर 2024 को ये कहकर रिक्वेस्ट खारिज कर दी कि प्रोडक्ट सही डिलीवर किया है। कंपनी की ग्रीवांस रिजॉल्यूशन टीम ने भी जवाब नहीं दिया।
जतिन थापर ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। फोटो और दस्तावेज भी आयोग के सामने पेश किए। जतिन ने खुद केस फाइल करते हुए जीत हासिल की है।
ओपन बॉक्स डिलीवरी के बाद भी ग्राहक को शिकायत करने का वैधानिक अधिकार
कमिशन ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश में कहा कि ओपन बॉक्स सुविधा उपभोक्ता को पैकेट देखने का अवसर दे सकती है, लेकिन इससे बाद में शिकायत करने का वैधानिक अधिकार खत्म नहीं होता।
डिलीवरी बॉय अक्सर उपभोक्ता को पैकेट खोलकर पूरी तरह जांच करने का पर्याप्त समय नहीं देते।
मंत्रा डिजाइन लिमिटेड ने खुद को केवल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मध्यस्थ बताते हुए आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 के तहत जिम्मेदारी से छूट का दावा किया।
कंपनी का कहना था कि विक्रेता कोई अन्य कंपनी थी, इसलिए प्लेटफॉर्म जिम्मेदार नहीं है।
कमीशन ने कहा कि धारा 79 को हर उपभोक्ता शिकायत में स्वतः कानूनी छूट नहीं माना जा सकता।
उपभोक्ता ने साबित कर दिया कि ऑर्डर और डिलीवर्ड प्रोडक्ट अलग था। इसे दोनों विपक्षी पक्षों की ओर से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया।
कंपनी का दावा, प्रोडेक्ट सही भेजा
ई-कॉमर्स कंपनी ने कहा कि भेजने से पहले प्रोडक्ट क्वालिटी चेक हुआ था और पैकेट सही स्थिति में डिलीवर किया गया।
कंपनी ने ओपन बॉक्स डिलीवरी का भी तर्क दिया और कहा कि अगर सामान गलत था तो उपभोक्ता डिलीवरी के समय ही पैकेट लेने से मना कर सकता था।
आयोग ने कहा कि केवल यह कहना कि पार्सल क्वालिटी चेक के बाद भेजा गया था, यह साबित नहीं करता कि उपभोक्ता को वही प्रोडक्ट मिला था जो उसने ऑर्डर किया था।
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