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  • मोहाली को पसंदीदा जीसीसी स्थान के रूप में स्थापित किया जा रहा है: सीमा बंसल

चंडीगढ़। मोहाली को एक प्राथमिकता वाले जीसीसी स्थान के रूप में स्थापित करने के लिए पंजाब के दृष्टिकोण, नीतिगत ढांचे और अनुकूल वातावरण को विकसित करने के उद्देश्य से जीसीसी लीडर्स के साथ रणनीतिक परामर्श किया गया। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने जीसीसी राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र विश्व भर में आर्थिक विकास, नवाचार और ज्ञान-आधारित प्रगति के लिए एक शक्तिशाली साधन बन चुका है। तकनीक आधारित निवेशों के लिए मोहाली तेजी से एक पसंदीदा स्थान के रूप में उभर रहा है, जहां डिजिटल नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत प्रतिभा पूल, आधुनिक बुनियादी ढांचा और प्रगतिशील नीति उपलब्ध है।

आईटी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार एक जीवंत वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सॉफ्टवेयर विकास, डिजिटल सेवाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण, फिनटेक, साइबर सुरक्षा और उभरते तकनीकी समाधानों के लिए अनुकूल हो। राज्य वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी), प्रौद्योगिकी विकास हब और नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स की स्थापना को भी प्रोत्साहित कर रहा है, जो पंजाब को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मोहाली–चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी कॉरिडोर पहले ही आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं के लिए एक प्रमुख हब के रूप में विकसित हो चुका है, जो प्रमुख कंपनियों को आकर्षित करने के साथ-साथ स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और पेशेवर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान हर वर्ष प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार कर रहे हैं, जिससे पंजाब तकनीक-आधारित उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन का मजबूत आधार प्रदान करता है।

पंजाब विकास आयोग की वाइस चेयरपर्सन सीमा बंसल ने बताया कि हाल ही में शुरू की गई औद्योगिक नीति प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन ढांचा प्रदान करते हुए आईटी पार्कों, प्रौद्योगिकी कैंपसों, अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं और नवाचार केंद्रों में निवेश को समर्थन देती है। इसके तहत दिए जाने वाले प्रमुख प्रोत्साहनों में पूंजी सब्सिडी, रोजगार सृजन प्रोत्साहन, एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति और बुनियादी ढांचा सहायता शामिल हैं, जो कंपनियों को अपना कार्य कुशलता से संचालित करने में सक्षम बनाते हैं।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि पंजाब की रणनीतिक स्थिति, मजबूत संपर्क व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता वाली जीवन शैली इसे तकनीकी पेशेवरों और वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक स्थान बनाती है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने निवेश को सुगम बनाने के लिए लचीला प्रोत्साहन ढांचा अपनाया है। अब निवेशक 10 से 15 वर्षों के लिए प्रोत्साहन अवधि चुन सकते हैं। आईटी/आईटीईएस इकाइयों और जीसीसी के लिए एफसीआई का कुल 125 प्रतिशत तक प्रोत्साहन तथा डेटा सेंटरों के लिए एफसीआई का 80 प्रतिशत प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि ये प्रोत्साहन वार्षिक समान किश्तों में वितरित किए जाएंगे।

इस गोलमेज सम्मेलन में श्रीमती श्रेशा जॉर्ज, मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर, बीसीजी; श्रीमती शालिनी पिल्ले, इंडिया लीडर – जीसीसी, केपीएमजी इंडिया; श्री शिवराज पलटा, चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर, एवराइज; श्री गौतम झा, लीड एआई/एमएल पार्टनर स्पेशलिस्ट, एडब्ल्यूएस; श्री अचुत्य घोष, एग्जीक्यूटिव रिसर्च लीडर, एचएफएस रिसर्च; डॉ. बिमल दीप सिंह, इंफोसिस; श्री दुश्यंत ठाकोर, डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, डब्ल्यूएआईपीए; कार्तिकेयन कुलथुमानी, वाइस प्रेसिडेंट, इन्वेस्ट इंडिया तथा श्री संजीव पाहवा, कोटिविटी जीसीसी उपस्थित थे।

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