



Prabhat Times
चंडीगढ़। बेशक, कांग्रेस हाईकमान ने बीती शाम वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियों की लिस्ट जारी करके अपनी तरफ से हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की है, लेकिन हालात ये हैं कि कांग्रेस आज 2026 में भी 2022 में ही खड़ी नज़र आ रही है।
2026 में भी 2022 जैसे हालात का मायना ये है कि कांग्रेस हाईकमान के फैसले से पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी, सुक्खी रंधावा मनीष तिवाड़ी जैसे बड़े नेता खुश नज़र नहीं आ रहे हैं।
जिम्मेदारियों की लिस्ट जारी होने के बाद चन्नी, रंधावा ने न तो हाईकमान का धन्यवाद किया है और न ही विरोध। जबकि मनीष तिवाड़ी ने एक्स पर पोस्ट कर कुछ बड़ा फैसला लेने के संकेत दे दिए हैं।
बता दें कि बीती शाम कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़े नेताओं की ड्यूटीयां बांट दी। संभावना के मुताबिक किसी भी वर्ग को नाराज़ किए बिना हर नेता को उसकी बनती जिम्मेदारी दी गई।
लेकिन दूसरी तरफ देखा जाए तो हाईकमान के फैसले से ज्यादा कुछ बदलता नज़र नहीं आ रहा है। क्योंकि हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही प्रधान पद पर कायम रखा है।
ये बात सर्वविदित है कि पिछले दिनों हाईकमान द्वारा गठित कमेटी के समक्ष और एकल तौर पर पंजाब कांग्रेस के बड़े नेता और उनके समर्थिक चरणजीत चन्नी को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रधान बनाए जाने की वकालत करते नज़र आए।
ये भी चर्चा है कि अधिकांश नेताओं ने चन्नी को प्रधान पद दिए जाने का समर्थन किया। लेकिन हाईकमान ने अपने लहजे में सभी नेताओं की राय को नज़रअंदाज़ करते हुए प्रधान पद पर बदलाव नहीं किया।
राजनीतिक माहिर मानते हैं की चरणजीत चन्नी, सुखी रंधावा की नाराजगी अभी भी कायम हैं। क्योंकि इतिहास गवाह है कि जो नेता प्रदेश प्रधान पद पर होता है वही पार्टी की चुनावों में जीत के बाद सीएम पद का मुख्य दावेदार होता है। ऐसी स्थिति में चन्नी, सुखी रंधावा की नाराजगी ज्यों की त्यों है।
मनीष तिवाड़ी ने किया पोस्ट – जो होना है, वह होकर रहेगा
उधर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मनीष तिवाड़ी भी हाईकमान के फैसले से नाखुश दिख रहे हैं। मनीष तिवाड़ी की नाराजगी का अंदाज़ा उनके द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट से लगाया जा रहा है।
तंजिया लहजे में तिवारी ने लिखा- ‘है बड़ा कोई अवगुण उसमे जिसे कोई हुनर आवे.’ पोस्ट में आगे लोकसभा सांसद ने लिखा कि काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं (हीनभावना या असुरक्षा की भावना) का भी कोई अचूक इलाज होता!
उन्होंने लिखा कि मैं यह मानता हूं कि पिछले 45 वर्षों में मुझे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बहुत कुछ मिला है और मैंने भी अपने पूरे वयस्क जीवन को दशकों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा के लिए समर्पित किया है. जो होगा, सो होगा या जो होना है, वह होकर रहेगा.
कांग्रेस में फिर 2022 जैसे हालात
कांग्रेस में 2022 में पंजाब में जैसे हालात हुए थे, वही स्थिति 2027 के चुनाव से पहले भी होने लगी है। तब कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद नवजोत सिद्धू मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन हाईकमान नहीं माना। इसके बाद हाईकमान ने सुखजिंदर रंधावा का नाम फाइनल किया तो सिद्धू नाराज हो गए।
उन्होंने कहा कि अगर जट्टसिख सीएम बनेगा तो मैं बनूंगा वर्ना किसी दूसरे वर्ग से बना दो। जिसके बाद चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री बन गए। इससे नाराज होकर नवजोत सिद्धू घर बैठ गए। पंजाब प्रधान होने के बावजूद उन्होंने कहीं भी प्रचार तक नहीं किया।
चुनाव के दौरान सिद़्धू और चन्नी गुट अलग-अलग दिखे, जिसका खामियाजा पार्टी को हार के रूप में झेलना पड़ा। इस बार कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन करने से डर गई। कांग्रेस को डर था कि राजा वड़िंग को प्रधान से हटाया तो उनका गुट सिद्धू की तर्ज पर पार्टी के खिलाफ काम करता। इसलिए पार्टी हाईकमान ने उन्हें पद से हटाने की हिम्मत नहीं दिखाई।
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