Prabhat Times
नई दिल्ली। LPG Crisis : अमेरिका-ईरान युद्ध से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बाधित होने से भारत में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.
देश में एलपीजी (LPG) के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर देने पर विचार कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां घरेलू गैस की सप्लाई को संतुलित रखने के लिए नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही हैं, ताकि सीमित स्टॉक के बावजूद ज्यादा लोगों तक गैस आसानी से पहुंचाई जा सके और किसी को परेशानी न हो।
14.2 किलो की जगह 10 किलो गैस देने का प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां 14.2 किलो वाले सिलेंडर में करीब 10 किलो LPG देने पर विचार कर रही हैं। इसका मकसद कम गैस को ज्यादा घरों तक बराबर तरीके से पहुंचाना है।
अधिकारियों का कहना है कि 10 किलो गैस भी करीब एक महीने तक आराम से चल सकती है।
अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर पर नई मात्रा लिखी जाएगी और कीमत भी उसी हिसाब से तय की जाएगी, जिससे ग्राहकों को साफ जानकारी मिल सके।
सप्लाई में कमी, विदेश पर निर्भरता बड़ी वजह
भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है।
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है।
कई गैस से भरे जहाज अभी भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति का इंतजार है।
हालात ऐसे हैं कि नए कार्गो भारत नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे देश के स्टॉक पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
आने वाले समय में और बढ़ सकती है समस्या
सरकारी अधिकारियों ने माना है कि LPG की उपलब्धता अब चिंता का विषय बनती जा रही है।
देश में रोजाना लगभग 93,500 टन गैस की खपत होती है, जिसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल घरों में होता है।
अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले हफ्तों में सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है।
ऐसे में सरकार को गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए और भी सख्त और बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
खाड़ी देशों से आती है गैस 90 प्रतिशत एलपीजी
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात से पूरा करता है.
एलपीजी की 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है. वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित हो गई है.
खाड़ी देशों से आने वाले एलपीजी शिपमेंट की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
पिछले सप्ताह केवल दो जहाज ही गैस लेकर आए थे. इनमें कुल 92,700 टन एलपीजी आई.
यह मात्रा भारत की महज एक दिन की खपत के बराबर है.
वर्तमान में भारत के झंडे वाले छह एलपीजी टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को दी गई चेतावनी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है.
रोज 93,500 टन खपत
भारत की दैनिक एलपीजी खपत लगभग 93,500 टन है. इसमें से 86% यानी करीब 80,400 टन घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल की जाती है.
मार्च के पहले पखवाड़े में कुल खपत में 17% की गिरावट आई.
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति को “चिंताजनक” बताते हुए गैस को बचाकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
हालांकि सरकार का दावा है कि वर्तमान में घरेलू सप्लाई नियमित है, लेकिन लोगों में घबराहट है.
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