Prabhat Times
जालंधर। कुछ रिश्ते वक्त के साथ पुराने नहीं होते, और गहरे हो जाते हैं। पीढ़ियों से, गुजरांवाला ज्वैलर्स, भोलूशाह ग्रुप के लिए यह सौभाग्य रहा है कि हम जालंधर के परिवारों की ज़िंदगी, उनके उत्सव और उनकी खुशियों के खास पलों का हिस्सा रहे हैं।
1949 से अपने ग्राहकों की संतुष्टि की वचनबद्धता को लिए चल रहे गुजरावालां ज्यूलर भोलू शाह ग्रुप द्वारा एक बार फिर नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं।
गुजरांवाला ज्यूलर के रमन जैन, चिंतन जैन तथा पंकज ने बताया कि अध्याय नया है, पर कहानी वही है। नई शुरुआत है, पर अपने तो अपने हैं।
इन वर्षों में, जो रिश्ता कभी ज्यूलरी से जुड़ा था, वह धीरे-धीरे कुछ और खास बन गया – एक अपनापन, एक भरोसा, एक रिश्ता।
रमन जैन, चिंतन जैन और पकंज ने कहा कि आज, जब हम एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं, तो अपने साथ वही विरासत लेकर चल रहे हैं, जिसने हमारी पहचान बनाई है। हमारी नई शुरुआत अतीत को पीछे छोड़ने के बारे में नहीं है।
यह उन सभी रिश्तों और यादों को साथ लेकर भविष्य की ओर बढ़ने के बारे में है, जिन्हें हमने वर्षों में संजोया है। और इसी सोच से जन्म लेता है हमारा अभियान “अपने तो अपने हैं।”
इस अभियान के माध्यम से हम जालंधर की उन सम्मानित हस्तियों की आवाज़ों को साथ ला रहे हैं, जिन्होंने हमें जाना, हम पर भरोसा किया और कई मायनों में हमारे साथ आगे बढ़े।
उनकी कहानियाँ और उनकी यादें उस रिश्ते की झलक हैं, जो वर्षों से हमारा और इस शहर का रहा है। क्योंकि आभूषण कभी सिर्फ़ आभूषण नहीं होते।
वे किसी शादी का हिस्सा बनते हैं, किसी उत्सव की याद बनते हैं, किसी खास पड़ाव की निशानी बनते हैं। वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं। और कहीं न कहीं, इन पलों में साथ रहने वाला जौहरी भी अपना बन जाता है।
वो रिश्ता सिर्फ़ कारोबार का नहीं रहता। वो अपनापन बन जाता है।
आज जब हम इस नई यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, हमारा वादा वही है उस भरोसे, उस गर्मजोशी और उन मूल्यों को आगे ले जाना, जो गुजरांवाला ज्वैलर्स, भोलूशाह ग्रुप के हमेशा से केंद्र में रहे हैं।
11 अक्टूबर को, उसी स्थान पर हमारा नया रूप, नई पहचान और नए अंदाज़ के साथ आभूषण स्टोर फिर से आपका स्वागत करेगा।
नया अध्याय है, पर कहानी वही है। नई शुरुआत है, पर अपने तो अपने हैं।
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