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जालंधर। इंटरनैशनल बॉडी बिल्डर वरिन्द्र घुम्मण की मौत के मामले में सामने आई मैडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में उत्तर भारत के बड़े फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल, अमृतर में दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।

मैडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से साफ है कि वरिन्द्र घुम्मण की मौत मैडिकल नैगलिजैंस की वजह से हुई। चर्चा है कि मैडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सामने आते ही फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले को रफा दफा करने के लिए जुगत भिड़ानी शुरू कर दी है।

9 अक्तूबर से लेकर अब तक वरिन्द्र घुम्मन मौत मामले में अस्पताल में जो कुछ भी हुआ, इससे बिल्कुल साफ है कि इस मामले में फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल के प्रबंधन से लेकर स्टाफ तक हर कोई वरिन्द्र घुम्मन की मौत को लिए जिम्मेदार है।

कंधे में मसल टियर के नॉर्मल ऑपरेशन के लिए फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल पहुंचे इंटरनैशनल बॉडी बिल्डर वरिन्द्र घुम्मन का ऑपरेशन 9 अक्तूबर 2025 को किया गया। सर्वविदित है कि ऑपरेशन थिएटर में जाते समय वरिन्द्र घुम्मन बिल्कुल फिट थे। ऑपरेशन थिएटर जाने की उनकी वीडियो भी वॉयरल हुई थी। लेकिन ऑपरेशन थिएटर में ऐसा क्या हुआ कि कुछ घण्टे के ऑपरेशन को अस्पताल के स्टाफ द्वारा सारा दिन लगा दिया गया।

इस सवाल का जवाब अमृतसर जिला प्रशासन के आदेशों पर सिविल सर्जन अमृतसर के नेतृत्व में गठित मैडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में हो गया है। दरअसल में अस्पताल में स्टाफ लापरवाही की वजह से वरिन्द्र घुम्मन की जान चली गई।

अस्पताल में ये हुई लापरवाहियां

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का सबसे पहला ज्वलंत उदाहरण ये है कि इंटरनेशनल फेम बॉडी बिल्डर वरिन्द्र घुम्मन के कंधे का ऑपरेशन एचओडी डाक्टर मोहित अरोड़ा की मौजूदगी में होने की बजाए असिस्टेंट सर्जन डाक्टर तपिश व उनके स्टाफ द्वारा किया गया।

जानकार सूत्रों का मानना है कि जब भी किसी बड़े अस्पताल में किसी सैलेब्रिटी, या किसी बड़े व्यक्ति की ट्रीटमैंट किया जाता है तो अस्पताल के सभी सीनीयर डाक्टर की मौजूदगी लाज़मी होती है। ताकि किसी भी तरह की कंपलीकेशन में ईलाज किया जा सके।

लेकिन इंटरनेशनल फेम वरिन्द्र घुम्मन के ऑपरेशन के दौरान ऐसा कुछ नहीं किया गया। वरिन्द्र घुम्मन की मौत की जांच कर रही मैडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि “प्री-एनेस्थेटिक चेकअप के दौरान कंसल्टेंट एनेस्थेटिस्ट ने रिकार्ड ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद पाया कि ईसीजी में स्टेरन पैटर्न के साथ लेफ्ट वेट्रिकूलर हाइपरट्रॉफी के संकेत मिले हैं।

इसके बावजूद ऑपरेशन के दौरान होने वाली संभावित कंपलीकेशन की रोकथाम के लिए किसी कार्डियोलॉजी संबधी राय नहीं ली गई और न ही एथलीट हार्ट एओसीएम/प्रिजव्रर्ड इंजेक्शन फ्रिक्शन के साथ हार्ट फेल्यौर की संभावना को खारिज करने के लिए इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांच तक नहीं की गई।

मैडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक वरिन्द्र घुम्मन को एनेस्थीसिया दिया गया, लेकिन रोटेटर कफ रिपेयर शोल्डर सर्जरी बीच चेयर पोजशिन में की गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा करना से सर्जरी/एनेस्थीसिया की लंबी अवधि के साथ जटिलता का जोखिम होता है।

इसके अतिरिक्त अस्पताल प्रबंधन द्वारा वरिन्द्र घुम्मन को शॉक दिए गए, लेकिन इस दौरान भी मैडिकल बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक ईको, इसीजी तक नहीं की गई।

अस्पताल प्रबंधन, एचओडी मोहित अरोड़ा से लेकर स्टाफ तक हर कोई जिम्मेदार

खैर, अब मैडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में स्पष्ट हो गया है कि फोर्टिस अस्पताल में लापरवाही के कारण वरिन्द्र घुम्मन की जान गई। हालांकि चर्चा सुनने में आई है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस लापरवाही के लिए स्टाफ को बलि का बकरा बनाए जाने की तैयारी की जा रही है।

लेकिन सत्य ये है कि इंटरनेशनल बॉडी बिल्डर वरिन्द्र घुम्मन की मृत्यु के लिए फोर्टस एस्कॉर्ट अस्पताल के प्रबंधन से लेकर एचओडी डाक्टर मोहित अरोड़ा, असिस्टेंट डाक्टर तपिश समेत वरिन्द्र घुम्मन के ऑपरेशन टीम से जुड़ा स्टाफ का हर सदस्य जिम्मेदार है।

अस्पताल प्रबंधन भी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। अब देखना ये है कि अमृतसर जिला प्रशासन इस मामले में बिना दबाव के काम करते हुए अस्पताल प्रबंधन से लेकर स्टाफ तक हर किसी की जिम्मेदारी फिक्स करते हुए कानूनी कार्रवाई करता है।

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