Prabhat Times
जालंधर। डिप्स जी.बी. ढिलवां में सजे आर्ट स्टूडियो में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है, मानो रंग केवल कैनवास पर नहीं, बल्कि अपनी-अपनी कहानियाँ लेकर सामने खड़े हों।
यहां हर चित्र में एक भाव है, हर रंग में एक विचार और हर रचना में जीवन को देखने का एक अलग नजरिया।
हाथ में मोतियों की माला वाला चित्र ऐसा आध्यात्मिक भाव जगाता है, जैसे पूरी मानवता एक साथ ईश्वर के चरणों में नतमस्तक होकर अरदास कर रही हो।
वहीं श्री दरबार साहिब का चित्र गहरी श्रद्धा और ध्यान की अनुभूति कराता है, मानो कोई आत्मा पूरी तन्मयता से ईश्वर का स्मरण कर रही हो।
झरने की तस्वीर कल्पना जीवन का सुंदर संदेश देती है, हर ऊंचाई के बाद गिरावट आ सकती है, लेकिन हर गिरावट अपने साथ एक नई राह भी लेकर आती है।
बुद्ध की शांत मुद्रा याद दिलाती है कि जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बाहरी वैभव नहीं, बल्कि मन की शांति है।
एक बालक द्वारा पंजाबी गुरमुखी स्लेट को थामे चित्र अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है । जो अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जुड़ता है, उसकी विकास यात्रा और मजबूत होती है।
मिस्र की कलाकृति में संतुष्टि और रहस्य का सुंदर मेल दिखाई देता है, जबकि फूलों से सजे गमले की रचना प्रकृति की खूबसूरती को नमन करती नजर आती है।
दरवाजे के पीछे से झांकती पंजाबी मुटियार का चित्र अपनों को देखने की उत्सुकता और मिलन की मासूम खुशी को अभिव्यक्त करता है।
वहीं गोद में गणपति को समेटे शिवशक्ति का चित्र मां और संतान के उस अनमोल रिश्ते को दर्शाता है, जिसमें स्नेह, सुरक्षा और अपनापन सहज रूप से समाया होता है।
नंदी की कलाकृति एक और महत्वपूर्ण संदेश देती है कि इस संसार का हर जीव सम्मान और अपनत्व का अधिकारी है। मानव हो या पशु, हर प्राणी इस खूबसूरत सृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कैनवास के पीछे छिपी सोच भी बनी आकर्षण
इस आर्ट स्टूडियो की खासियत केवल खूबसूरत चित्र नहीं, बल्कि उन चित्रों के पीछे छिपी कलाकारों की सोच भी रही।
शिक्षकों ने अपनी रचनाओं के पीछे की भावनाओं, कल्पनाओं और विचार-प्रक्रिया को भी साझा किया। उनके लिए चित्र बनाना केवल रंग भरना नहीं, बल्कि भावनाओं को आकार देना था।
स्टूडियो में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता ने इसे और जीवंत बना दिया। बच्चों ने रंगों, ड्रॉइंग और पेंटिंग की विभिन्न तकनीकों को सीखते हुए रचनात्मकता को करीब से समझा।
डिप्स मैनेजमेंट ने विद्यार्थियों की इस भागीदारी और उनके सीखने के उत्साह की सराहना की।
संतोष शिरके और उनकी समर्पित टीम ने इस पूरे कला संसार को आकार देने में शानदार कार्य किया। उनकी मेहनत और कलात्मक दृष्टि ने स्टूडियो के हर कोने को एक अलग पहचान दी।
सीएओ रमनीक सिंह ने आर्ट फैकल्टी से संवाद करते हुए उनके प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि कला विद्यार्थियों को केवल रचनात्मक नहीं बनाती, बल्कि उन्हें भावनाओं, संस्कृति और जीवन को गहराई से देखने की दृष्टि भी देती है।
वाइस चेयरपर्सन श्रीमती प्रीतिंदर कौर ने भी सभी कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
आर्ट स्टूडियो की कलात्मकता और विचारपूर्ण प्रस्तुति ने विद्यालय के प्रिंसिपल्स और अभिभावकों को भी बेहद प्रभावित किया।
अभिभावकों ने चित्रों को केवल कला के रूप में नहीं, बल्कि भावनाओं और जीवन-संदेशों की अभिव्यक्ति के रूप में देखा और अपने विचार साझा किए।
डिप्स जी.बी. ढिलवां का यह आर्ट स्टूडियो अब केवल चित्रों से सजा स्थान नहीं, बल्कि रंगों, संस्कारों, संस्कृति और कल्पनाओं से संवाद करता एक जीवंत संसार बन गया है, जहां हर दीवार कुछ कहती है, हर चित्र कुछ सिखाता है और हर रंग दिल में एक नई अनुभूति छोड़ जाता है।
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