Prabhat Times
जालंधर। रंगों की खूबसूरती, कल्पनाओं की उड़ान और पंजाब के समृद्ध विरसे की खुशबू, इन सभी का मनमोहक संगम डिप्स के जीबी ढिलवां में देखने को मिला, जहां भव्य आर्ट स्टूडियो एवं आर्ट गैलरी का आयोजन किया गया।
यह पहल विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और कलात्मक प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का सुंदर प्रयास रही।
कार्यक्रम में डिप्स की वाइस चेयरपर्सन श्रीमती प्रीतिंदर कौर, सीएओ रमनीक सिंह, सीईओ डॉ. मोनिका मंडोत्रा, डायरेक्टर कॉलेजिज डॉ. के.के. हंडू, डायरेक्टर अकादमिक्स डॉ. रोमिला शर्मा, डायरेक्टर कैप्टन रोहित द्विवेदी, डिप्स ढिलवां के प्रिंसिपल पंकज चोपड़ा तथा जीबी ढिलवां के प्रिंसिपल मेजर सिंह, प्रिंसिपल बी एड कॉलेज मुकेश सहित क्षेत्र के गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
क्षेत्रीय गणमान्यों में एसएमओ प्रेम कुमार, नगर प्रधान संजीव, नगर पार्षद बलजीत ढिल्लों, नगर पार्षद बलराज ढिल्लों, मंडी बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एवं आम आदमी पार्टी के सदस्य कुलदीप पाठक सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। समूह स्टाफ और अभिभावकों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। भगवान शिव की थीम पर आधारित आकर्षक नृत्य-प्रस्तुति, ऑर्केस्ट्रा और गिद्दा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रस्तुतियों में आधुनिक कला के साथ भारतीय संस्कृति और पंजाब की लोक परंपराओं की खूबसूरत झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डिप्स कॉलेज ढिलवां द्वारा लगाई गई कला प्रदर्शनी रही। यहां पंजाब के गौरवशाली विरसे को रंगों और कलाकृतियों के माध्यम से जीवंत किया गया।
आर्ट गैलरी में श्री दरबार साहिब के सुंदर चित्र, पंजाबी लिपि, पंजाबी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को कलात्मक अंदाज में प्रदर्शित किया गया।
इन कलाकृतियों ने देखने वालों को पंजाब की मिट्टी, भाषा और विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
लोक विरसा प्रदर्शनी में चाटी की लस्सी, मक्की की रोटी-साग, फुलकारी, पुराने नोट एवं सिक्के तथा पारंपरिक आभूषणों को भी प्रदर्शित किया गया।
यह केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं बल्कि पंजाब के अतीत, वर्तमान और सांस्कृतिक पहचान को एक ही छत के नीचे समेटने वाला खूबसूरत प्रयास रहा।
डिप्स प्रबंधन ने कहा कि कला बच्चों को केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं देती, बल्कि उन्हें सोचने, महसूस करने और अपनी पहचान को अभिव्यक्त करने की आजादी भी देती है।
आर्ट स्टूडियो विद्यार्थियों की कल्पनाओं को उड़ान देने के साथ उन्हें अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व करना भी सिखाएगा।
डिप्स में शिक्षा किताबों तक सीमित नहीं—यहां रंगों में कल्पना, कला में पहचान और विरसे में संस्कार भी पढ़ाए जाते हैं।
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