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जालंधर। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल 4 नवरात्रि आती है, जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि , तीसरी चैत्र नवरात्रि और चौथी शारदीय नवरात्रि होती है।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। इसके साथ ही हिंदू नववर्ष भी आरंभ हो जाता है।

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखा जाता है।

इसके साथ ही व्रती लोग पूरे नौ दिनों के लिए कलश स्थापना भी करते हैं और दशमी तिथि को व्रत का पारण करते हैं।

आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का सही मुहूर्त्त और क्या करें क्या नहीं…

चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना सही मुहूर्त

घटस्थापना कब है?

पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. 2026 में इसके समय इस प्रकार हैं.

प्रतिपदा तिथि शुरू- 18 मार्च 2026, रात 11:39 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त- 19 मार्च 2026, रात 8:58 बजे तक

उदय तिथि (सूर्योदय वाली तिथि) के अनुसार, पहला व्रत और घटस्थापना दोनों 19 मार्च 2026 को होंगे.

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (कलश स्थापना)

सुबह का शुभ मुहूर्त- 19 मार्च 2026, सुबह 06:25 से 07:41 बजे तक

अभिजीत मुहूर्तः सुबह का समय न मिले तो क्या करें?

अगर आप सुबह का शुभ समय में कलश स्थापना नहीं कर पाते, तो आप इसे दोपहर के अभिजीत मुहूर्त यानी 12:05 बजे से 12:53 बजे के बीच भी कर सकते हैं.

चैत्र नवरात्रि 2026 व्रत के नियम

लोग आमतौर पर दिन की शुरुआत घर और पूजा स्थान की सफाई से करते हैं. नहाने के बाद देवी के लिए भोग बनाते हैं, पूजा करते हैं, मंत्र बोलते हैं और आरती करते हैं.

वही खाना बाद में प्रसाद के रूप में खाते हैं. माना जाता है कि इन दिनों हल्का और साधारण खाना खाने से शरीर स्वस्थ और संतुलित रहता है.

व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं

व्रत के दौरान कुछ चीजें पूरी तरह से नहीं खाई जातीं जैसे प्याज, लहसुन, गेहूं और चावल जैसे अनाज, दालें, मांस, अंडे, शराब और तंबाकू.

इसके बजाय लोग फल, आलू, कद्दू, लौकी, कच्चा केला और दूध से बनी चीजें खाते हैं. पानी, दूध, छाछ और ताजे जूस पी सकते हैं.

साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल होता है. जीरा, काली मिर्च और इलायची जैसे हल्के मसाले ही लिए जाते हैं.

व्रत में क्या करें

व्रत में ज्यादा देर भूखे न रहें. हर कुछ घंटे में फल और मेवा जैसी छोटी चीजें खाने से ऊर्जा बनी रहती है.

पर्याप्त पानी, दूध और जूस पीना भी जरूरी है. कुट्टू, सिंघाड़ा और राजगीरा के आटे से बनी चीजें खाएं. शरीर में शक्कर और नमक का संतुलन बनाए रखना चाहिए ताकि कमजोरी या चक्कर न आए.

व्रत में क्या न करें

प्याज, लहसुन और भारी मसाले से खाना बनाना नहीं चाहिए. सरसों या तिल का तेल भी आमतौर पर नहीं लिया जाता. मांसाहारी खाना, शराब और तंबाकू बिल्कुल नहीं खाते.

व्रत में भारी खाना, खासकर शाम की पूजा से पहले, नहीं खाना चाहिए. पैक्ड जूस से बचें क्योंकि उनमें अतिरिक्त नमक और प्रिजर्वेटिव हो सकते हैं.

व्रत में पानी पीना बहुत जरूरी है

व्रत में शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें और पूरे दिन तरल चीजें पीते रहें. तरबूज, खीरा और नारियल पानी शरीर को ठंडा रखते हैं.

हर्बल चाय और छाछ भी अच्छे विकल्प हैं. कैफीन या ज्यादा शक्कर वाले ड्रिंक से बचें क्योंकि इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है. थकावट या कमजोरी महसूस हो तो आराम करें और अपने शरीर की सुनें.

मां दुर्गा की पूजा में न करें ये काम

भक्ति सबसे जरूरी है, लेकिन शास्त्रों में बताया गया है कि कुछ चीजें मां दुर्गा को पसंद नहीं होतीं. अगर गलती से भी ये चीजें चढ़ा दी जाएं, तो पूजा का शुभ फल कम हो सकता है.

तुलसी के पत्ते

हालांकि, तुलसी बहुत पवित्र मानी जाती है, लेकिन देवी भागवत पुराण में मां दुर्गा की पूजा में तुलसी का प्रयोग मना है. ऐसे में मां को लाल फूल खासकर गुड़हल (हिबिस्कस) बहुत प्रिय हैं, इसलिए वही चढ़ाएं.

बासी फल या मुरझाए फूल

मां को हमेशा ताजे फल ही भोग में दें. ऐसे फूल न चढ़ाएं, जिन्हें पहले किसी ने सूंघ लिया हो. साथ ही, मदार (आक) के फूल भी मां दुर्गा की पूजा में निषिद्ध माने जाते हैं.

टूटी-फूटी पूजा सामग्री

कलश स्थापना के लिए जब आप माटी का घड़ा या दीया (दिया) लें, तो ध्यान रखें कि वह बिल्कुल टूटा‑फूटा या चटका हुआ न हो. टूटी वस्तुओं को अशुभ माना जाता है.

पूजा के पास चमड़े की चीजें न रखें

बेल्ट, वॉलेट या किसी भी तरह की चमड़े की वस्तु को पूजा घर में या उसके आसपास रखना अच्छा नहीं माना जाता. शास्त्रों में चमड़े को अशुद्ध माना गया है.

लहसुन और प्याज का सेवन न करें

नवरात्रि के नौ दिनों में लहसुन‑प्याज जैसी तामसिक चीजें घर में नहीं लानी चाहिए. इन दिनों घर में सात्त्विक (पवित्र और शांत) वातावरण बनाए रखना आवश्यक माना जाता है.

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