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  • आने वाली पीढ़ियों के लिए भूजल बचाना जरूरी, किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों की बजाय नहर का पानी इस्तेमाल करना चाहिए—मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • बेअदबी विरोधी कानून बन चुका है, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को उम्रकैद का सामना करना पड़ेगा—मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब और देश के सियासी हालात का मुद्दा उठाने के लिए 5 मई को राष्ट्रपति से मुलाकात की जाएगी—मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने पैतृक गांव में लोगों से बातचीत की, मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का भरोसा दिया

संगरूर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज टिकाऊ खेती और लंबे समय तक पानी के संरक्षण के लिए व्यापक रूपरेखा का खुलासा करते हुए पंजाब के किसानों को भूजल पर निर्भरता घटाकर नहरी पानी की सिंचाई की ओर मुड़ने का आह्वान किया।

अपने पैतृक गांव सतौज के दौरे के दौरान ग्रामीणों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब का भविष्य उसके जल संसाधनों से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है और इन्हें सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, जो हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब का अस्तित्व स्वाभाविक रूप से इसके पानी से जुड़ा हुआ है और इसे सुरक्षित रखना केवल नीतिगत प्राथमिकता ही नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले धान सीजन के लिए 1 मई से ही नहरी पानी दिया जाएगा, जो पारंपरिक सिंचाई समय-सारिणी से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

उन्होंने आगे कहा, “यह पंजाब के इतिहास में पहली बार है कि धान की बुवाई के सीजन से पहले किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए 1 मई से नहरी पानी छोड़ा जा रहा है।”

इस पहल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई की सुविधा के लिए नहरों और खालों में 21,000 क्यूसेक पानी पहले ही छोड़ा जा चुका है।

उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि पानी की एक-एक बूंद को सुरक्षित रखा जाए और उसका समुचित उपयोग किया जाए।”

पंजाब के पानी पर अधिकार की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब ने न तो अन्य राज्यों के साथ पानी पर कोई समझौता किया है और न ही पाकिस्तान की ओर पानी जाने दिया है, ताकि पूरा पानी हमारे किसानों के हित में इस्तेमाल हो सके।”

उन्होंने दशकों से लगातार अत्यधिक भूजल दोहन के कारण चिंताजनक स्तर तक पानी घटने की चुनौती का जिक्र किया और इसमें तुरंत बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने किसानों से ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम करने की अपील करते हुए कहा, “भूजल एक कीमती और सीमित संसाधन है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।

अब अपनी सोच में सामूहिक बदलाव लाने का समय आ गया है। नहरी पानी केवल विकल्प नहीं, बल्कि पंजाब की कृषि का भविष्य है।”

सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मार्च 2026 से अब तक राज्य भर में सिंचाई परियोजनाओं पर 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसके तहत पानी के समुचित वितरण को सुनिश्चित करने और नुकसान को कम करने के लिए लगभग 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई हैं और खालों को बहाल किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि धान के मौजूदा सीजन से पहले 4,000 किलोमीटर और खालों तथा 3,000 किलोमीटर पाइपलाइन को चालू कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे इन प्रणालियों का परीक्षण करने, रुकावटों की पहचान करने और कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।

इस बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर विकसित किया गया है और यह पंजाब के सिंचाई नेटवर्क को आधुनिक बनाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

इस ढांचे की व्यापकता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “दो भाखड़ा नहरों के बराबर पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और भूजल पर निर्भरता काफी घटेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के तहत समर्पित योजनाओं के माध्यम से भूजल स्तर को ऊपर उठाने में मदद मिलेगी, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी।

उन्होंने कहा, “यह केवल वर्तमान फसल चक्र के बारे में नहीं है, बल्कि यह पंजाब की कृषि के भविष्य को सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने के बारे में है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह मेरा गांव और मेरे अपने लोग हैं। मैं यहां सभी को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और इससे यह दौरा और भी खास बन जाता है।”

उन्होंने ग्रामीणों से सीधी अपील करते हुए कहा, “ट्यूबवेलों के माध्यम से अधिक भूजल का दोहन न करें। आज बचाई गई हर बूंद हमारे भविष्य की रक्षा करेगी।”

अन्य उपायों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरी नेटवर्क के साथ-साथ हर 20 मीटर की दूरी पर रिचार्ज पॉइंट स्थापित किए गए हैं, ताकि भूजल भंडारों की प्राकृतिक रूप से पुनःपूर्ति हो सके।

विधायी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026” का पारित होना एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा, “इस कानून के तहत बेअदबी के लिए सख्त सजा सुनिश्चित की गई है, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करने के किसी भी प्रयास को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसी घिनौनी हरकतें न केवल धर्म के खिलाफ अपराध हैं बल्कि मानवता के खिलाफ भी अपराध हैं, जिनका उद्देश्य अक्सर शांति और सद्भाव को भंग करना होता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं समाज को हमेशा नेकी और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने कहा, “इस कानून के लागू होने से दोषी पाए जाने वालों को उदाहरणात्मक सजा मिलेगी। यह एक मजबूत निवारक उपाय के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी घिनौनी घटनाएं दोबारा न हों।”

एक और बड़े सुधार की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार ने खेतों में से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की तारों को भूमिगत करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।”

उन्होंने बताया कि यह परियोजना इस समय कार्यान्वयन के चरण में है और जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह मानव जीवन के जोखिम को समाप्त करेगा, फसलों के नुकसान को रोकेगा और खेतीबाड़ी कार्यों में इन तारों के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करेगा।

यह परियोजना किसानों के जीवन में सार्थक बदलाव लाएगी।”

उन्होंने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट उनके पैतृक गांव से शुरू होगा, जिसमें 2,000 एकड़ क्षेत्र में फैले लगभग 413 ट्यूबवेल और 1,100 बिजली के खंभे शामिल होंगे।

व्यापक दृष्टिकोण को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य किसानों को और सशक्त बनाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और समृद्ध पंजाब का निर्माण करना है।

पंजाब सरकार का हर निर्णय लोगों की भलाई और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “हमारी सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।”

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