Prabhat Times

चंडीगढ़। पंजाब में कांग्रेसी नेताओं के बीच चल रही खींचतान अब खत्म होने जा रही है। पिछले दिनों गठित कमेटी की रिपोर्ट और फीडबैक के आधार पर हाईकमान इस नतीजे तक लगभग पहुंच चुकी है कि कौन पार्टी नेतृत्व करेगा और कौन कैम्पेन करेगा।

जातिगत समीकरण, कमेटी फीडबैक के आधार पर हाईकमान ने ऐसा फॉर्मूला तैयार किया है, जिसमें हर धड़ा चाहे चरणजीत चन्नी का हो या फिर राजा वड़िंग… सुखी रंधावा हो या फिर प्रताप बाजवा…हर नेता को उनका उचित प्रतिनिधित्व देते हुए अहम जिम्मेदारियां दी जाएंगी। फॉर्मूला ऐसा है कि हर धड़ा एडजस्ट हो जाएगा।

कांग्रेस के आला सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत चन्नी के हाथ पंजाब कांग्रेस की बागडौर होगी। इस संबंधी राहुल गांधी ने इसकी सहमति दे दी है।

सूत्रों का दावा है कि चन्नी को कमान सौंपने से पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूदा प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग और सांसद सुखजिंदर रंधावा को दिल्ली बुला कर कॉन्फीडेंस में ले चुके हैं।

आला सूत्रों के मुताबिक चन्नी के साथ पूर्व सांसद विजयइंदर सिंगला को वर्किंग प्रधान की घोषणा हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक हाईकमान के इस फैसले से दलित प्रधान के साथ हिंदू वर्किंग प्रधान लगाकर जातीय समीकरण का संतुलन बिठाया गया है।

वहीं जट्‌टसिख वोटर नाराज न हों, इसलिए कांग्रेस विधायक दल नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा अपने पद पर बने रहेंगे। जबकि राजा वड़िंग और सुखजिंदर रंधावा को 2027 के चुनाव में अहम कमेटियों की बागडोर दी जाएगी।

सूत्रों से मिली इस जानकारी को लेकर राजनीतिक माहिर मानते हैं कि कांग्रेस द्वारा 2022 वाले फॉर्मूले पर ही काम किया है।

हालांकि इस फॉर्मूले में 2022 चुनावों में नवजोत सिद्धू की अहम भूमिका थी, लेकिन उस वक्त ये फॉर्मूला फेल हो गया था, और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी।

राजनीतिक माहिर कांग्रेस के राजनीतिक नुकसान का कारण नवजोत सिद्धू की सीएम कुर्सी पर नज़र और कैप्टन अमरेंद्र सिंह नाराजगी मानते हैं।

राजनीतिक माहिर मानते हैं कि अगर सभी नेता हाईकमान के इस फॉर्मूले से सहमत हैं तो ही कारगर साबित होगा।

क्योंकि हाईकमान द्वारा इससे पहले भी इन सभी नेताओं को दिल्ली बुलाकर समझाया जा चुका है, लेकिन सभी नेता वापसी अंबाला क्रास कर पंजाब की हद में आते ही फिर से बिखर जाते रहे हैं।

राजनीतिक माहिर मानते हैं कि अगर सभी सहमत हैं और हाईकमान द्वारा दी जा रही जिम्मेदारियों से संतुष्ट हैं तो चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा हो सकता है। देखना होगा कि कांग्रेस इस फैसले को कब और किस तरीके से अनाउंस करती है।

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